
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। शुक्रवार की सुबह खेरवा गांव में बाघ के हमले में एक महिला की जान चली गई। बाघ के हमले में महिला के पति, ससुर, पिता और मासूम बेटी के घायल होने के बाद ग्रामीण काफी आक्रोशित हो गए थे, जिन्होंने वन अमले पर हमला कर दिया। बाघ के हमले में मरने वाली महिला का नाम फूल बाई पाल (करीब 40 वर्ष) पत्नी पहलू पाल है।
महिला की चीख-पुकार सुनकर पति पहलू पाल, महिला के पिता और ससुर दशई पाल उसे बचाने पहुंचे, लेकिन बाघ ने उन पर भी हमला कर दिया। महिला की चार वर्षीय मासूब बच्ची गुडि़या भी घायल हो गई है।
ग्रामीणों द्वारा किए गए हमले में पनपथा रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव का सिर फूट गया और उन्हें तुरंत मानपुर अस्पताल भेज दिया गया। बताया गया है कि रेंजर के सिर पर टांके लगाए गए हैं। इसके बाद पहुंची पतौर रेंजर अंजू वर्मा पर भी ग्रामीणों ने हमला कर दिया जिन्हें कभी काफी चोट आई है। इसके अलावा राहुल किरार और अन्य वन कर्मियों को भी चोट आई है।

दोपहर 12 बजे के आसपास बाघ का रेस्क्यू किया गया और उसे बेहोशी की हालत में एक पिंजरे में डाल दिया गया। जब पिंजरे को वन अमला बाहर लेकर आया तो बाहर खड़े कई ग्रामीणों ने अचानक वन कर्मियों पर हमला कर दिया। एक पल को तो ऐसा लगा जैसे ग्रामीण बाघ को मार देना चाहते हैं, लेकिन अगले ही पल वनकर्मियों ने बाघ के पिंजरे को वाहन में लाद दिया और वहां से निकल पड़े। इस दौरान ग्रामीणों ने वन विभाग के वाहनों पर भी पत्थर और लाठी से हमला किया लेकिन वन अमला वहां से बच निकला।
यह जानकारी सामने आई है कि पनपथा पहुंचने के बाद जब बाघ को होश में लाने का प्रयास किया गया तो वह होश में नहीं आया। इसके बाद पशु विभाग के डाक्टरों ने उसे देखा तो पाया कि उसकी जान जा चुकी थी।
फील्ड डायरेक्टर डा अनुपम सहाय ने बताया कि बाघ की मौत हो गई है लेकिन किन कारणों से मौत हुई है यह तो पोस्टमार्टम के बाद ही पता चलेगा। ग्रामीण बाघ को टच भी नहीं कर पाए थे इसलिए ग्रामीणों के हमले से तो बाघ की मौत होना असंभव है।
उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा बफर क्षेत्र अंतर्गत खेरवा टोला में हुए दर्दनाक घटनाक्रम के बाद अब बाघ की मौत को लेकर नया खुलासा सामने आया है। वन विभाग द्वारा उमरिया में कराए गए पोस्टमार्टम में यह तथ्य सामने आया कि गांव में घुसा बाघ ट्रेंकुलाइज किए जाने से पहले ही मर चुका था। इस रिपोर्ट के बाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य प्रदेश के वरिष्ठ वन अधिकारियों ने बाघ का दोबारा पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया है। बाघ के शव को जबलपुर भेजा गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा दोबारा परीक्षण किया जा रहा है।
रविवार देर रात खेरवा टोला गांव में बाघ के हमले में एक महिला की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य ग्रामीण घायल हो गए थे। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया था। सोमवार सुबह वन विभाग की टीम, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान घायल और आक्रामक स्थिति में दिखाई दे रहे बाघ को नियंत्रित करने के लिए ट्रेंकुलाइज करने की कार्रवाई की गई थी।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल पर जब बाघ दिखाई दिया, तब उसके शरीर में किसी प्रकार की स्पष्ट हरकत नहीं हो रही थी। लेकिन सुरक्षा और प्रोटोकॉल के तहत बिना निस्तेज किए उसके करीब जाना जोखिम भरा था। इसी कारण टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज किया। बाद में जब बाघ का पोस्टमार्टम कराया गया, तब यह जानकारी सामने आई कि उसकी मौत काफी पहले ही हो चुकी थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया। अब बाघ के शव का परीक्षण जबलपुर स्थित विशेषज्ञ संस्थान में कराया जा रहा है, ताकि पहली रिपोर्ट की पुष्टि हो सके और मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकें। इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
वन विभाग ने रविवार को हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को भी दे दी है।
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