
नईदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। बेतवा नदी के स्टॉप डैम पर पिलरों के बीच छलांग लगाकर स्कूल पहुंचने वाले बच्चों की तस्वीरों ने आखिरकार प्रशासन को हरकत में ला दिया। नवदुनिया में खबर प्रकाशित होने और वीडियो के राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित होने के बाद सोमवार को प्रशासन ने सबसे पहले उस रास्ते को कंटीली झाड़ियों से बंद कराया, जिस पर रोज बच्चों की जान दांव पर लगती थी।
अब जिला प्रशासन ककरुआ और इमलिया के विद्यार्थियों को राहत देने के लिए ग्राम बंधेरा के माध्यमिक विद्यालय को हाईस्कूल में उन्नयन करने का प्रस्ताव शासन को भेजने की तैयारी कर रहा है।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अभी भी कायम है। खतरे का रास्ता तो बंद कर दिया गया, लेकिन पढ़ाई का सुरक्षित रास्ता कब खुलेगा। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों ने कभी रोमांच के लिए डैम पार नहीं किया। मजबूरी यह थी कि सड़क मार्ग से स्कूल जाने पर आठ से दस किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि स्टॉप डैम पार करने पर दूरी महज डेढ़ किलोमीटर रह जाती है। यही कारण था कि कक्षा नौवीं और दसवीं के आठ-दस विद्यार्थी रोज इसी रास्ते से पलोह हाईस्कूल पहुंचते थे। इस रास्ते का उपयोग केवल बच्चे ही नहीं, आसपास के ग्रामीण भी वर्षों से करते आ रहे हैं।
सोमवार को प्रशासनिक और शिक्षा विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। ककरुआ की ओर से डैम पर जाने वाले रास्ते पर कांटेदार झाड़ियां लगाकर आवाजाही रोक दी गई है। चौकीदार की ड्यूटी भी लगाई गई है ताकि कोई बच्चा दोबारा जोखिम उठाकर डैम पार न करे। रोजगार सहायक सुनील मालवीय ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम तत्काल उठाया गया है।
एसडीएम क्षितिज शर्मा ने बताया कि संबंधित गांवों में हाईस्कूल नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को पलोह जाना पड़ता है। छात्राओं को साइकिलें उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन अधिक दूरी और खराब संपर्क मार्ग के कारण कई विद्यार्थी पैदल डैम से निकल जाते थे। उन्होंने कहा कि डैम पर सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं और जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बंधेरा स्कूल को हाईस्कूल में उन्नयन करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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