डिजिटल डकैती: विदिशा के ऑनलाइन सेंटर से बंगाल के आवास हितग्राहियों के खातों में सेंध, मास्टरमाइंड गिरफ्तार
इस मामले में पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले की पुलिस ने विदिशा के पेढ़ी क्षेत्र में दबिश देकर आरोपित ऑनलाइन सेंटर संचालक वसीम खान को गिरफ्तार किया है। आ ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 28 Feb 2026 08:14:18 PM (IST)Updated Date: Sat, 28 Feb 2026 08:21:10 PM (IST)
बंगाल पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपित वसीम खान।HighLights
- पुलिस गिरफ्त में पेढ़ी क्षेत्र का वसीम खान, रायसेन में भी दर्ज है कई मामले।
- आरोपी से फिंगरप्रिंट स्कैनर और संदिग्ध डेटा वाली हार्ड डिस्क बरामद हुई।
- लोकेशन ट्रेस करते हुए बंगाल पुलिस विदिशा पहुंची और उसे दबोच लिया।
नवदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। जिले में अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों के एक ऐसे खतरनाक नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो हजारों किलोमीटर दूर बैठकर गरीबों के हक पर डाका डाल रहा था।
पश्चिम बंगाल की ''बंगला आवास योजना'' के लाभार्थियों की राशि विदिशा के एक ऑनलाइन सेंटर से अवैध रूप से निकाली जा रही थी।
इस मामले में पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले की पुलिस ने विदिशा के पेढ़ी क्षेत्र में दबिश देकर आरोपित ऑनलाइन सेंटर संचालक वसीम खान को गिरफ्तार किया है। आरोपित के पास से फिंगरप्रिंट स्कैनर और संदिग्ध डेटा वाली हार्ड डिस्क बरामद हुई है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब बांकुरा जिले के सालतोरा निवासी उत्तम बाउरी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके पीएनबी खाते से 23 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच चार किस्तों में 40 हजार रुपये पार कर दिए गए।
चौंकाने वाली बात यह थी कि उत्तम बाउरी राज्य सरकार की आवास योजना के लाभार्थी हैं और यह राशि योजना की ही थी।
जब बंगाल पुलिस ने ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगाली, तो अंतिम ट्रांजैक्शन का सेटलमेंट खाता विदिशा के एचडीएफसी बैंक में वसीम खान के नाम पर मिला। तकनीकी लोकेशन ट्रेस करते हुए बंगाल पुलिस विदिशा पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपी को दबोच लिया।
ऑनलाइन ठगी है, साइबर सेल जाओ...बोलने वाले पुलिसकर्मी लेंगे ट्रेनिंग
एइपीएस तकनीक से अदृश्य''चोरी, रिकॉर्ड गायब
- बंगाल पुलिस के अनुसार आरोपित वसीम खान ''पे निअरबाय'' पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन सेंटर संचालित करता था।
- पुलिस को संदेह है कि आरोपित ने आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एइपीएस) का दुरुपयोग कर फिंगरप्रिंट क्लोनिंग के जरिए यह राशि निकाली।
- जब पुलिस ने आरोपित से 31 जनवरी के ट्रांजैक्शन से संबंधित सीसीटीवी फुटेज या अनिवार्य रजिस्टर मांगा, तो वह कोई रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका।
- पुलिस ने वसीम के कब्जे से एक मोबाइल फोन, ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट स्कैनर, पासबुक और एक हार्ड डिस्क जब्त की है, जिसमें कई अन्य राज्यों के डेटा होने की आशंका है।
रायसेन का वांटेड अब बंगाल पुलिस की कस्टडी में
- आरोपी वसीम खान का पुराना रिकॉर्ड भी दागदार रहा है। वह पड़ोसी जिले रायसेन में भी कई गंभीर मामलों में वांटेड रह चुका है।
- साक्ष्य मिटाने और फरार होने की प्रबल आशंका के चलते पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से ट्रांजिट रिमांड मंजूर होने के बाद बंगाल पुलिस उसे अपने साथ ले गई।
- पुलिस को अंदेशा है कि यह खेल केवल कुछ हजार का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़ा हो सकता है, जो सरकारी योजनाओं के डेटाबेस में सेंध लगाकर ठगी कर रहा है।
सावधानी: बायोमेट्रिक लॉक ही एकमात्र बचाव
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, बिना ओटीपी के होने वाली इस ठगी से बचने के लिए नागरिकों को अपने आधार बायोमेट्रिक को एम आधार ऐप या यूआईडीएआइ की वेबसाइट पर जाकर लॉक रखना चाहिए। इससे आपकी अनुमति के बिना कोई भी आपके फिंगरप्रिंट का उपयोग कर बैंक खाते से राशि नहीं निकाल सकेगा।
दो दिन पहले पश्चिम बंगाल की पुलिस विदिशा आई थी। उन्होंने वसीम की गिरफ्तारी के लिए सहयोग मांगा था। कोतवाली पुलिस के सहयोग से वसीम को गिरफ्तार कर बंगाल पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर उसे अपने साथ ले गई है। वसीम पर रायसेन जिले में भी कई अपराध होने की जानकारी मिली है। उसका आपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
– रोहित काशवानी, एसपी, विदिशा।