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अफसरों को पता नहीं चला और ठेकेदार ने बुलडोजर से खोद दिया डेढ़ सौ साल पुराना पुल, बवाल के बाद जागा प्रशासन

मध्य प्रदेश के विदिशा के नगर पालिका कार्यालय से महज तीन किमी दूर अशोक नगर मार्ग पर बेतवा नदी पर बने करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराने पुल पर तीन दिनों तक बुलडो...और पढ़ें

By Ajay JainEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Wed, 08 Jul 2026 10:33:06 AM (IST)Updated Date: Wed, 08 Jul 2026 10:37:24 AM (IST)
अफसरों को पता नहीं चला और ठेकेदार ने बुलडोजर से खोद दिया डेढ़ सौ साल पुराना पुल, बवाल के बाद जागा प्रशासन
विदिशा के अशोक नगर मार्ग स्थित बेतवा नदी पर बने प्राचीन पुल पर पाइपलाइन बिछाने के लिए चलाया गया बुलडोजर।

HighLights

  1. अफसरों को पता नहीं चला और ठेकेदार ने बुलडोजर से खोद दिया डेढ़ सौ वर्ष पुराना पुल
  2. बेतवा नदी पर सिंधिया रियासत के समय बना था पुल, विरोध के बाद रुका काम
  3. ठेकेदार पर ठीकरा फोड़कर जिम्मेदारी से बच रहे नगर पालिका के अफसर

नवदुनिया प्रतिनिधि, विदिशा। नगर पालिका कार्यालय से महज तीन किमी दूर अशोक नगर मार्ग पर बेतवा नदी पर बने करीब डेढ़ सौ वर्ष पुराने पुल पर तीन दिनों तक बुलडोजर चलाकर पाइपलाइन बिछाने का कार्य होता रहा, लेकिन नगर पालिका के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। मंगलवार को जब इंटरनेट मीडिया पर पुल को क्षतिग्रस्त किए जाने का विरोध शुरू हुआ, तब नपा अधिकारियों ने काम रुकवाया।

हालांकि तब तक पुल का आधे से अधिक हिस्सा क्षतिग्रस्त किया जा चुका था। अब अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए नगर पालिका के अधिकारी बिना अनुमति पुल पर खुदाई कराने की जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता गुड्डू किरार ने इंटरनेट मीडिया पर प्राचीन पुल को बुलडोजर से तोड़कर पाइपलाइन बिछाने का वीडियो साझा करते हुए आपत्ति जताई। उनका कहना था कि वे पिछले तीन दिनों से पुल को क्षतिग्रस्त नहीं करने का आग्रह कर रहे थे।


वीडियो वायरल होने पर मचा बवाल

मंगलवार को उन्होंने नगर पालिका के इंजीनियरों से भी काम रुकवाने का अनुरोध किया, लेकिन किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली। इसके बाद उन्होंने वीडियो इंटरनेट मीडिया पर साझा करते हुए घोषणा की कि यदि पुल तोड़ने का काम नहीं रोका गया तो वे बुधवार से पुल पर ही धरना देंगे। वीडियो के व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद शहर के पुरातत्व प्रेमी सक्रिय हुए और नगर पालिका प्रशासन को यह कार्य रुकवाना पड़ा।

अधिकारी बोले, पुल पर खोदाई की अनुमति नहीं ली

लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री सोमेश श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्राचीन पुल पर खोदाई के लिए विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई। वहीं नगर पालिका के एई आर.के. वर्मा का भी कहना था कि ठेकेदार ने इस संबंध में नगर पालिका से भी अनुमति नहीं ली। उन्होंने बताया कि हलाली बांध से पानी लाने की परियोजना का सुपरविजन टाटा कंपनी कर रही है और उसे तत्काल काम रोकने के निर्देश दिए गए हैं। वर्मा से जब पूछा गया कि परियोजना की डिजाइन में पाइपलाइन को नदी पार कराने की क्या व्यवस्था की गई थी, तो उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी डिजाइन और सुपरविजन करने वाली कंपनी के पास ही है।

संरक्षण की बजाय मिटा रहे विरासत

सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रमोद व्यास का कहना है कि बेतवा नदी पर बना यह पुल सिंधिया रियासत के समय का है, जो वर्षों तक सैकड़ों गांवों के लोगों की आवाजाही का प्रमुख माध्यम रहा। बाद में नया पुल बनने के बावजूद यह प्राचीन पुल शहर की धरोहर के रूप में जाना जाता है। उनका कहना है कि इसका संरक्षण करने के बजाय इसे मिटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। विदिशा की सबसे बड़ी पहचान उसका इतिहास है, इसलिए इस पुल को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।

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89 करोड़ की योजना में बरती लापरवाही

गौरतलब है कि शहर में वर्षभर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए करीब तीन वर्ष पहले 89 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत हुई थी। इसके तहत हलाली बांध से विदिशा के कालिदास डैम स्थित फिल्टर प्लांट तक 34 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इस पाइपलाइन के माध्यम से प्रतिदिन 38 एमएलडी पानी सीधे फिल्टर प्लांट तक पहुंचेगा। अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत शहर में छह नई पानी की टंकियां तथा 114 किमी लंबा नया वितरण नेटवर्क भी तैयार किया जाना है।