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Agnipath Scheme: पहले बैच का चार साल का कार्यकाल होने जा रहा है पूरा, 25% को ही मिलती है स्थायी सेवा, जानिए क्या है नियम

Agnipath Scheme: अग्निपथ योजना के पहले बैच का चार साल का कार्यकाल 2026 में पूरा होने जा रहा है।

By Akash SharmaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 07 Jul 2026 03:49:01 PM (IST)Updated Date: Tue, 07 Jul 2026 04:17:33 PM (IST)
Agnipath Scheme: पहले बैच का चार साल का कार्यकाल होने जा रहा है पूरा, 25% को ही मिलती है स्थायी सेवा, जानिए क्या है नियम
अग्निपथ योजना: जानिए चयन और सेवामुक्ति के नियम (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 2026 में पूरा होगा पहला कार्यकाल
  2. 25 प्रतिशत को मिलेगी स्थायी सेवा
  3. सेवामुक्त अग्निवीरों को मिलेगा पैकेज

डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। देश में अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। इसकी वजह यह है कि साल 2023 की शुरुआत में प्रशिक्षण शुरू करने वाले पहले बैच का चार साल का कार्यकाल वर्ष 2026 में पूरा (Agniveer 4 Year Rule) होने जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि चार साल की सेवा पूरी करने के बाद किन अग्निवीरों को सेना में स्थायी नियुक्ति मिलेगी और किन्हें सेवामुक्त किया जाएगा।

मौजूदा नियमों के अनुसार, अग्निवीरों के चयन और सेवामुक्ति की प्रक्रिया पूरी तरह तय मानकों और मेरिट के आधार पर होती है।

फिलहाल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही मिलती है स्थायी सेवा

अग्निपथ योजना लागू होने के समय वर्ष 2022 में यह प्रावधान किया गया था कि चार साल की सेवा पूरी करने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही नियमित सेवा में शामिल किया जाएगा। शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों की सेवा समाप्त कर दी जाएगी।


खबरों के अनुसार, अब तीनों सेनाओं में इस अनुपात को बढ़ाने की मांग उठ रही है। बताया जा रहा है कि भारतीय नौसेना 75 प्रतिशत तक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने की पक्षधर है, जबकि भारतीय सेना और वायुसेना लगभग 50 प्रतिशत तक संख्या बढ़ाने की इच्छुक हैं। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में फिलहाल 25 प्रतिशत वाला नियम ही प्रभावी है।

ऐसे तय होता है कौन रहेगा और कौन होगा सेवामुक्त

चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अग्निवीरों का मूल्यांकन कई निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि पूरे सेवा काल के प्रदर्शन को महत्व दिया जाता है।

चयन प्रक्रिया में जवान के अनुशासन, ड्यूटी के प्रति समर्पण, दैनिक कार्य प्रदर्शन और व्यवहार का मूल्यांकन किया जाता है। इसके साथ ही शारीरिक दक्षता परीक्षा में प्रदर्शन, हथियार संचालन की क्षमता, नई तकनीकों की समझ और सैन्य कौशल को भी देखा जाता है।

इसके अलावा मेडिकल फिटनेस भी चयन का महत्वपूर्ण आधार है। सेना द्वारा निर्धारित चिकित्सा मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य होता है। टीम के साथ काम करने की क्षमता और समन्वय भी मूल्यांकन का हिस्सा रहता है।

मेरिट सूची के आधार पर मिलता है मौका

सेना चार वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर सभी अग्निवीरों की मेरिट सूची तैयार करती है। इस सूची में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले और सभी निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जाता है। जो अभ्यर्थी मेरिट सूची में पीछे रह जाते हैं या आवश्यक मानकों को पूरा नहीं कर पाते, उनकी सेवा चार वर्ष पूरे होने के बाद समाप्त कर दी जाती है।

सेवामुक्त अग्निवीरों को मिलती हैं ये सुविधाएं

जो अग्निवीर नियमित सेवा के लिए चयनित नहीं होते, उन्हें सरकार की ओर से कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सेवा समाप्त होने पर उन्हें 11.71 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जाती है, जो पूरी तरह टैक्स फ्री होती है।

इसके अलावा अन्य सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए आयु सीमा में छूट का प्रावधान है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और असम राइफल्स में 10 प्रतिशत पद आरक्षित रखे गए हैं।

सेवामुक्त अग्निवीरों को स्किल सर्टिफिकेट और अनुभव प्रमाणपत्र भी दिया जाता है, जिससे निजी और सरकारी क्षेत्र में रोजगार पाने में सहायता मिलती है। वहीं कई राज्य सरकारों ने पुलिस भर्ती में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की भी घोषणा की है।