
डिजिटल डेस्क, जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मजबूत रणनीति और नेतृत्व से प्रदेश के नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। जिससे नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं में कमल खिला। मुख्यमंत्री की अगुवाई और मार्गदर्शन में मिशन मोड पर यह चुनाव लड़ा गया। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष और विभिन्न मुख्यमंत्रियों ने राजस्थान में भाजपा के दमदार प्रदर्शन और जीत पर मुख्यमंत्री की रणनीति को सराहा और उनकी प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव में टिकट वितरण में पार्टी और संगठन को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने चुनाव का मोर्चा खुद संभाला तथा बड़े नेताओं को संभागवार जिम्मेदारी दी और प्रतिदिन फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने स्वयं चुनावी मैदान में उतरकर 10 नगर निगमों में रोड शो किए। निकाय चुनाव के परिणामों के बाद सभी पार्षदों को एकजुट रखा और निर्दलीयों को साधा।
मुख्यमंत्री की इस रणनीति से कांग्रेस की जीत के दावे और उनकी पिक्चर फ्लॉप शो साबित हुई। उनकी अगुवाई में भरतपुर और डीग जिले की 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में भाजपा ने अपना बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की और भरतपुर नगर निगम में भी निर्विरोध कमल खिलाया। जयपुर में लगातार सातवीं बार नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने एक बार फिर अपना निर्विवाद नेतृत्व साबित किया है।
राजस्थान में इस बार एक साथ सभी 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद सहित 252 नगर पालिकाओं में चुनाव एक साथ हुए हैं। इन निकायों में दमदार जीत सरकार के ढाई साल के काम पर जनता की मोहर है। इससे पहले मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हुए चुनाव में पिछले साल 7 में से 5 उपचुनाव में भाजपा जीती थी।
कांग्रेस राज (2018-23) में - मात्र 11 निकाय निर्विरोध
जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में मुख्यमंत्री के रोड शो ने राजधानी की जीत में अहम भूमिका निभाई। परकोटे से ही भाजपा के मेयर पद के प्रत्याशी सुनील कोठारी जीते हैं। मुख्यमंत्री ने रोड शो में परकोटे के लोगों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने लव जिहाद, धर्मांतरण कानून, डिस्टर्ब एरिया बिल, यूसीसी की चर्चा के साथ महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों में देखने को मिला।
कांग्रेस ने जातिगत समीकरण और होटल पॉलिटिक्स की रणनीति अपनाई, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सोशल इंजीनियरिंग और वन स्टेट-वन इलेक्शन की रणनीति के आगे विपक्ष की हर चाल फेल हो गई। कांग्रेस को पार्षदों को होटलों में बंद करना पड़ा, फिर भी पार्षद भागते रहे, जबकि भाजपा ने पहले ही 33 बोर्ड निर्विरोध बनाकर बढ़त ले ली।