बिहार में 7 मई को बड़ा राजनीतिक आयोजन, कैबिनेट विस्तार में PM सहित कई दिग्गज नेताओं की मौजूदगी; नए चेहरों को मिलेगा मौका
बिहार में 7 मई को पटना के गांधी मैदान में सम्राट चौधरी सरकार का कैबिनेट विस्तार होगा। ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 05 May 2026 10:57:07 AM (IST)Updated Date: Tue, 05 May 2026 10:57:07 AM (IST)
सम्राट चौधरी सरकार का कैबिनेट विस्तार 7 मई को पटना में होगा (फाइल फोटो)HighLights
- चुनाव के कारण टला था मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम
- नए चेहरों को मंत्रिमंडल में मौका मिलने की संभावना
- पहली बार केवल मंत्रियों का होगा शपथ ग्रहण
डिजिटल डेस्क: बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आने जा रहा है। सम्राट चौधरी सरकार के गठन के 22 दिन बाद 7 मई को राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में कैबिनेट विस्तार का भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। इसे लेकर प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं।
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VVIP कार्यक्रम, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
इस आयोजन में कई बड़े नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के अनुसार समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।
चुनाव के कारण टला था विस्तार
दरअसल, पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के चलते बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को टाल दिया गया था। अब तीन राज्यों में एनडीए की जीत के बाद गठबंधन उत्साहित है और इसी माहौल में इस कार्यक्रम को भव्य रूप देने की तैयारी की गई है।
नए चेहरों को मिल सकता मौका
सूत्रों के मुताबिक इस कैबिनेट विस्तार में कई नए चेहरों को जगह मिल सकती है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए संगठन में सक्रिय नेताओं को अवसर दिए जाने की चर्चा है। जानकारी यह भी है कि जदयू और भाजपा के मंत्रियों की संख्या समान रखी जाएगी और कुछ पुराने मंत्रियों के विभागों में बदलाव संभव है।
गांधी मैदान में बनेगा नया इतिहास
गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने 2025 में चुनाव जीतने के बाद गांधी मैदान में शपथ ली थी, लेकिन इस बार केवल मंत्रियों का शपथ ग्रहण होगा। गांधी मैदान के इतिहास में यह पहली बार होगा जब मुख्यमंत्री के बिना सिर्फ मंत्रियों का सामूहिक शपथ ग्रहण आयोजित किया जाएगा। इसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।