बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- कहीं भी नमाज अदा करने का नहीं दे सकते अधिकार; समझें क्या है पूरा मामला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एयरपोर्ट के पास रमजान में नमाज पढ़ने की अनुमति देने से इन्कार किया। अदालत ने कहा कि एयरपोर्ट क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोपरि है और धा ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 06 Mar 2026 09:42:24 AM (IST)Updated Date: Fri, 06 Mar 2026 10:01:58 AM (IST)
छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने की अनुमति देने का मामला। (फाइल फोटो)HighLights
- एयरपोर्ट के पास नमाज की अनुमति देने से कोर्ट ने इन्कार
- अदालत बोली सुरक्षा सर्वोपरि, धार्मिक गतिविधियों पर नहीं छूट
- टैक्सी-ऑटो ड्राइवर यूनियन ने नमाज के लिए जगह मांगी
डिजिटल डेस्क। बॉम्बे हाई कोर्ट ने छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों को रमजान के दौरान नमाज पढ़ने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि रमजान इस्लाम का महत्वपूर्ण धार्मिक महीना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी स्थान पर नमाज पढ़ने का अधिकार मांग सकता है। खासकर एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील और उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सुरक्षा को धर्म से ऊपर बताया
- जस्टिस बी.पी. कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत सुरक्षा संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
- कोर्ट ने कहा कि एयरपोर्ट परिसर और उसके आसपास का क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील होता है, जहां किसी भी तरह की भीड़ या अस्थायी व्यवस्था सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म चाहे जो भी हो, सुरक्षा सबसे पहले है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
अस्थायी शेड हटाए जाने के बाद दाखिल हुई थी याचिका
- यह मामला टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेंस यूनियन द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास बने एक अस्थायी शेड के नीचे नमाज अदा करते थे। हालांकि, पिछले वर्ष अधिकारियों ने उस शेड को हटा दिया था।
- यूनियन ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें उसी स्थान पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाए या फिर आसपास किसी अन्य स्थान को इसके लिए निर्धारित किया जाए।
वैकल्पिक स्थानों का सर्वे, लेकिन नहीं मिली उपयुक्त जगह
- इससे पहले अदालत ने पुलिस और एयरपोर्ट प्राधिकरण को निर्देश दिया था कि वे आसपास के क्षेत्रों का सर्वे कर यह देखें कि क्या नमाज के लिए कोई अन्य स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।
- गुरुवार को अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि सात अलग-अलग स्थानों का सर्वे किया गया, लेकिन भीड़, सुरक्षा चिंताओं और एयरपोर्ट के विकास कार्यों के कारण कोई भी जगह उपयुक्त नहीं पाई गई।
कोर्ट ने मदरसे में नमाज पढ़ने की दी सलाह
- रिपोर्ट देखने के बाद अदालत ने कहा कि वह इस मामले में कोई राहत नहीं दे सकती। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे आसपास मौजूद धार्मिक स्थलों का उपयोग करें।
- कोर्ट ने बताया कि प्रस्तावित स्थान से करीब एक किलोमीटर के भीतर एक मदरसा मौजूद है, जहां नमाज अदा की जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में टर्मिनल-1 के पुनर्विकास के दौरान यदि संभव हुआ तो याचिकाकर्ता अपनी मांग एयरपोर्ट प्राधिकरण के सामने रख सकते हैं।