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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सीजेपी के प्रदर्शन के अचानक उग्र होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इसके पीछे संभावित डिजिटल नेटवर्क, सोशल मीडिया गतिविधियों और विदेशी कनेक्शन की जांच तेज कर दी है। एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ एक ऑनलाइन अभियान कुछ ही दिनों में दिल्ली की सड़कों पर बड़े प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं तक कैसे पहुंच गया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कई लोग छात्र नहीं थे। साथ ही हिंसा में बाहरी तत्वों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पुलिस इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय उन संदिग्ध हैंडल्स की जांच कर रही है, जिनके जरिए कथित तौर पर भ्रामक जानकारी प्रसारित की गई। अधिकारियों के अनुसार, कुछ अकाउंट्स पाकिस्तान से संचालित होने की आशंका जताई गई है। इन हैंडल्स से यह दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान सात लोगों की मौत हुई, 391 लोग घायल हुए और 250 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस इन दावों की सत्यता और इनके प्रसार के स्रोत की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक पूरे अभियान को गति देने के लिए मुख्य रूप से इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। सीजेपी के इंस्टाग्राम हैंडल ने कुछ ही दिनों में दो करोड़ से अधिक फॉलोअर्स जुटा लिए, जिससे इसकी पहुंच तेजी से बढ़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी कम अवधि में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुड़ना असामान्य है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
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सुरक्षा एजेंसियां अब उन प्रमुख सोशल मीडिया हैंडल्स और आईपी एड्रेस की पहचान करने में जुटी हैं, जहां से कथित तौर पर इस अभियान का संचालन किया गया। पिछले महीने केंद्र सरकार के आदेश पर सीजेपी का आधिकारिक एक्स हैंडल ब्लॉक किया गया था। इसके बाद कुछ ही मिनटों में "काकरोच इज बैक" नाम से नई आईडी बनाई गई, जिसके इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स तेजी से बढ़े। सोमवार तक इस पेज को फॉलो करने वालों की संख्या 2.30 करोड़ से अधिक बताई गई। इसी मंच के जरिए दोबारा अभियान को आगे बढ़ाया गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आंदोलन के घोषणापत्र, वेबसाइट और पोस्टर तैयार करने में चैटजीपीटी और क्लाउड जैसे आधुनिक एआई टूल्स का इस्तेमाल किया गया। एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि इन तकनीकों का उपयोग किस स्तर पर और किस उद्देश्य से किया गया। सोमवार तक सीजेपी के आधिकारिक हैंडल पर 2.91 लाख और "काकरोच इज बैक" हैंडल पर तीन लाख से अधिक फॉलोअर्स दर्ज किए गए।
सुरक्षा एजेंसियां सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। अभिजीत दीपके हाल ही में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे हैं। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इस डिजिटल अभियान को विदेशों से फंडिंग या लॉजिस्टिक सपोर्ट तो नहीं मिला। जांच में बांग्लादेश और नेपाल के छात्र आंदोलनों से जुड़े पैटर्न का भी अध्ययन किया जा रहा है।
जांच के दौरान इस आंदोलन में विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों की भागीदारी भी एजेंसियों के दायरे में है। नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुए प्रदर्शन में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों की सहभागिता सामने आई। इसके अलावा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ), बिरसा आंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बापसा) और क्रांतिकारी युवा संगठन जैसे छात्र संगठनों की सक्रियता की भी जांच की जा रही है।