
डिजिटल डेस्क। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव का सिलसिला एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार विवाद की वजह सिंधु घाटी सभ्यता की विश्व प्रसिद्ध और लगभग 4500 वर्ष पुरानी कांस्य प्रतिमा 'डांसिंग गर्ल' (नर्तकी की मूर्ति) के ऐतिहासिक स्वरूप में किया गया बदलाव है।
कक्षा 9 की नई कला इतिहास (History of Arts) की पुस्तक 'मधुरिमा' में इस प्राचीन कलाकृति को उसके मूल स्वरूप के विपरीत, वस्त्रों से ढके हुए शरीर के साथ और गहरे रंग में चित्रित किया गया है, जिस पर शिक्षाविदों और इतिहासकारों ने गंभीर आपत्तियां उठाई हैं।
मोहनजो-दड़ो से प्राप्त यह 10.5 सेंटीमीटर ऊंची ऐतिहासिक मूर्ति 'लॉस्ट-वैक्स' (मोम पिघलाकर धातु ढालने की तकनीक) कला का एक बेजोड़ नमूना मानी जाती है। मूल पुरातत्व साक्ष्यों के अनुसार, इस नर्तकी की प्रतिमा के शरीर पर आभूषणों और चूड़ियों के अलावा कोई वस्त्र नहीं है।
हालांकि, कक्षा 9 की नई पुस्तक में इसके ऊपरी हिस्से को कपड़ों से ढका हुआ दिखाया गया है। दिलचस्प बात यह है कि एनसीईआरटी की ही कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में इसी मूर्ति को उसके वास्तविक और मूल ऐतिहासिक रूप के बेहद करीब प्रदर्शित किया गया है, जिसके चलते एक ही परिषद की अलग-अलग कक्षाओं की किताबों में विरोधाभास खड़ा हो गया है।
इस विवादास्पद बदलाव पर पाठ्यपुस्तक विकास समिति के प्रमुख और प्रसिद्ध विद्वान मिशेल डैनिनो ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने इस कदम की तुलना यूरोपीय कला इतिहास की उस घटना से की जब माइकल एंजेलो की प्रसिद्ध 'डेविड' प्रतिमा को ढकने के लिए उस पर अंजीर का पत्ता लगा दिया गया था।
डैनिनो ने कहा कि शिक्षकों से संवाद के दौरान किसी ने भी मूल मूर्ति के स्वरूप पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी। प्राचीन कलाकृति में नग्नता को अनुचित मानना वास्तव में 'विक्टोरियन औपनिवेशिक मानसिकता' का परिचायक है। उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि एक तरफ हम खुद को उपनिवेशवाद की सोच से मुक्त करने की बात करते हैं, और दूसरी तरफ इतिहास व कला के साथ ऐसी छेड़छाड़ कर रहे हैं जो एक तरह से 'नकली कलाकृति' पेश करने जैसा है।
यह पहली बार नहीं है जब इस ऐतिहासिक प्रतिमा का आधुनिक रूपांतरण चर्चा में आया हो। इससे पहले वर्ष 2023 में आयोजित 'इंटरनेशनल म्यूजियम एक्सपो' के दौरान जारी किए गए आधिकारिक शुभंकर (मैस्कॉट) में भी 'डांसिंग गर्ल' को समकालीन कपड़ों और रंगों के साथ पेश किया गया था। उस समय भी कई पुरातत्वविदों और कला समीक्षकों ने इतिहास के इस प्रकार आधुनिकीकरण करने की तीखी निंदा की थी।
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विवाद के तूल पकड़ने के बाद एनसीईआरटी के प्रशासनिक हलकों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस पूरे विषय और पुस्तक में छपी तस्वीर की तकनीकी व ऐतिहासिक वैधता की जांच का जिम्मा पाठ्यपुस्तक विकास टीम (Textbook Development Team) को सौंप दिया गया है। टीम की समीक्षा रिपोर्ट के बाद ही इस पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि पुस्तक के आगामी संस्करणों में इस तस्वीर को सुधारा जाएगा या नहीं।