
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया (Datia Bypoll Result)और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनावों की मतगणना (Upchinav Result 2026) जारी है। सामान्य तौर पर तीन सीटों का उपचुनाव राष्ट्रीय चर्चा का विषय नहीं बनता, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है।
पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों (GenZ Protest) के बाद यह पहला चुनाव है। इसलिए राजनीतिक दलों के साथ-साथ विश्लेषकों की भी नजर इस बात पर है कि क्या युवाओं का गुस्सा वोटिंग पैटर्न में किसी तरह दिखाई देता है। यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि छात्र आंदोलन का सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ा है।
मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की 2 अप्रैल को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत अयोग्यता के बाद खाली हुई थी।
इस सीट पर भाजपा ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। उनके सामने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुंवर घनश्याम सिंह हैं, जो दो बार विधायक रह चुके हैं और पूर्व शाही परिवार से जुड़े हैं। दतिया को लंबे समय तक पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। 2008 से 2018 तक लगातार तीन बार विधायक रहने वाले मिश्रा 2023 का चुनाव हार गए थे। इस बार टिकट बदलने के फैसले से उनके समर्थकों की नाराजगी भी चुनाव प्रचार के दौरान चर्चा में रही।
बिहार की बांकीपुर सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। यहां से अब तक कोई भाजपा उम्मीदवार चुनाव नहीं हारा है। यह सीट भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई।
चुनाव के दौरान भाजपा ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने नामांकन के अगले ही दिन पारिवारिक कारणों का हवाला देकर नाम वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। इस बदलाव को लेकर विपक्ष ने भाजपा पर सवाल उठाए। वहीं राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि उनकी पार्टी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को विभिन्न सामाजिक और जातीय वर्गों का समर्थन मिला है।
गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता योगेशभाई नारंदास पटेल के निधन के बाद खाली हुई। यहां भाजपा ने वडोदरा नगर निगम के पूर्व पार्षद सतीश गोविंदभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष भीखाभाई रबारी पर दांव लगाया है।
योगेश पटेल गुजरात की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। उन्होंने 1990 से 2007 तक रावपुरा सीट का प्रतिनिधित्व किया और परिसीमन के बाद बनी मंजलपुर सीट से 2012, 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की थी।
दतिया, बांकीपुर और मंजलपुर की ये तीन सीटें भले ही संख्या में कम हों, लेकिन इनके नतीजों को राजनीतिक दल बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। एक तरफ भाजपा अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे जनता के मूड का संकेत मान रहा है। पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के बाद यह पहला चुनावी मुकाबला है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या युवाओं की नाराजगी केवल सड़कों तक सीमित रही या फिर उसका असर मतदान में भी देखने को मिलेगा। इसका जवाब इन उपचुनावों के अंतिम नतीजों से ही मिलेगा।
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Q1. किन सीटों पर उपचुनाव की मतगणना हो रही है?
उत्तर: मध्य प्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर।
Q2. दतिया सीट खाली क्यों हुई थी?
उत्तर: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की 2 अप्रैल को अयोग्यता के बाद यह सीट रिक्त हुई थी।
Q3. बांकीपुर सीट पर भाजपा का उम्मीदवार क्यों बदला गया?
उत्तर: अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया।
Q4. मंजलपुर सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
उत्तर: भाजपा विधायक योगेशभाई नारंदास पटेल के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी।
Q5. इन उपचुनावों पर पूरे देश की नजर क्यों है?
उत्तर: क्योंकि ये पेपर लीक विरोध में हुए राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलनों के बाद हुए पहले उपचुनाव हैं और इनके नतीजों को राजनीतिक माहौल तथा युवा मतदाताओं के रुझान के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।