सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस का हलफनामा: जंतर-मंतर पर FRS का इस्तेमाल छात्रों पर नहीं, गंभीर अपराधियों पर हुआ
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) के उपयोग को लेकर उठे विवाद पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट म...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 18 Aug 2026 12:44:19 PM (IST)Updated Date: Tue, 18 Aug 2026 12:45:22 PM (IST)
HighLights
- दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट की
- बिना क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले छात्रों पर नहीं होगी कार्रवाई
- प्रदर्शनकारियों की भीड़ में अपराधी भी सक्रिय थे
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) के उपयोग को लेकर उठे विवाद पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। दिल्ली पुलिस पर अवैध निगरानी और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाते हुए याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनके जवाब में यह हलफनामा पेश किया गया है।
पुलिस ने साफ किया है कि इस तकनीक का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को निशाना बनाना नहीं था। बिना क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले किसी भी छात्र या आम नागरिक के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सिर्फ 2,873 संदिग्धों पर जांच
दिल्ली पुलिस की एसआईटी केवल उन 2,873 संदिग्धों की जांच करेगी, जिनका पुराना और गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है।
गंभीर अपराधियों की हुई पहचान
FRS द्वारा पहचाने गए 2,873 लोगों में से 2,402 का नाम पुलिस की 'क्राइम कुंडली' में और 471 का नाम 'पुलिस डोजियर' में दर्ज मिला है। इनमें 92 लोग ऐसे हैं जिन पर 10 से ज्यादा केस दर्ज हैं और 47 पुलिस के घोषित हिस्ट्रीशीटर हैं।
FRS तकनीक का इस्तेमाल और वेरिफिकेशन
भीड़ की स्कैनिंग के लिए मोबाइल FRS यूनिट्स का इस्तेमाल किया गया। इन चेहरों का मिलान हत्या, लूट, रेप, अपहरण, पॉक्सो और हथियारों की तस्करी जैसे संगीन अपराधों वाले डेटाबेस से किया गया (इसमें ट्रैफिक नियम तोड़ने जैसे छोटे मामले शामिल नहीं थे)। मशीन के अलर्ट के बाद मौके पर मौजूद अधिकारियों ने खुद फील्ड वेरिफिकेशन भी किया।
प्रदर्शन की आड़ में हुए अपराध
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि 20 से 26 जुलाई के बीच जंतर-मंतर इलाके में 7 वाहन चोरी, 67 आम चोरी और 123 सामान गुम होने के मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़े साबित करते हैं कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में अपराधी भी सक्रिय थे।
डेटा बेचने के आरोप पूरी तरह खारिज
पुलिस ने आम लोगों का बायोमेट्रिक डेटा इकट्ठा कर प्राइवेट कंपनियों को बेचने या निजी पहचान पत्र के आधार पर समन भेजने के दावों को झूठा और भ्रामक प्रचार बताया है।
सबूत और रिकॉर्डिंग
हलफनामे के अनुसार, नियमों के तहत केवल गंभीर अपराधियों का बायोमेट्रिक डेटा ही राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के पास सुरक्षित रखा जाता है। इसके अलावा, पूरे घटनाक्रम, सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान और पुलिस पर हुए हमलों के वीडियो सबूत बॉडी-कैमरा, सीसीटीवी और आधिकारिक वीडियोग्राफी के जरिए जांच के लिए सुरक्षित कर लिए गए हैं।