
धर्म डेस्क। राजधानी दिल्ली में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के साथ ही विजयदशमी (दशहरे) की तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन हाल ही में हुई अचानक बेमौसम बारिश ने एशिया के सबसे बड़े पुतला बाजार तितारपुर (टैगोर गार्डन, वेस्ट दिल्ली) के कारीगरों और व्यापारियों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
दशहरे पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के दहन के लिए खुले पार्कों और मैदानों में रखे कई फीट ऊंचे पुतले बारिश में भीगकर गल गए। इससे पुतला निर्माताओं को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। हालांकि, कारीगर अब दिन-रात मेहनत करके इन पुतलों को सुखाने और दोबारा से वॉटरप्रूफ कागजी लेयर और साज-सज्जा कर दुरुस्त करने में जुट गए हैं।
बाजार में रावण के कई पुतले ढांचागत रूप से पूरी तरह तैयार हो चुके थे। बस उन पर वॉटर-रेजिस्टेंट (पानी से बचाव करने वाली) आखिरी परत चढ़ाना बाकी था। लेकिन इससे पहले ही बारिश आ गई और पुतलों का ढांचा गल गया।
अब कारीगरों को पुतलों के सूखने का इंतजार करना पड़ रहा है, जिसके बाद दोबारा से कागज की परतें चढ़ाई जाएंगी और फिर अंतिम चरण में रंग-रोगन और साज-सज्जा की जाएगी। इससे लागत और समय दोनों दोगुना हो रहे हैं।
करीब पांच दशकों से इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े तितारपुर के वरिष्ठ कारीगरों और व्यापारियों ने सरकार से राहत की गुहार लगाई है-
वेस्ट दिल्ली के टैगोर गार्डन स्थित तितारपुर में 5 फीट से लेकर 50 फीट तक की ऊंचाई के रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले बनाए जाते हैं।
हालांकि इस बार विदेश से कोई बड़ा ऑर्डर प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर के अलावा हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों से पुतलों की भारी मांग है।