डिजिटल डेस्क। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट 6 मार्च 2026 को घोषित किया था। परिणाम जारी होने के बाद कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों ने परीक्षा पास करने का झूठा दावा किया। अब तक चार ऐसे दावे सामने आए हैं, जिन्हें जांच के बाद गलत पाया गया है।
यूपीएससी और प्रशासनिक अधिकारियों ने इन मामलों की जांच कर वास्तविक सफल उम्मीदवारों की पहचान स्पष्ट की। बीते नौ दिनों में सामने आए इन मामलों ने परीक्षा परिणाम को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी।
AIR 113 को लेकर हुआ विवाद
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली शिखा गौतम ने दावा किया कि उन्होंने यूपीएससी में 113वीं रैंक हासिल की है। उनके इस दावे के बाद घर में जश्न मनाया गया और मिठाइयां भी बांटी गईं।
हालांकि, बाद में जांच में सामने आया कि AIR 113 दिल्ली की रहने वाली शिखा के नाम है। यूपीएससी को इस मामले में ई-मेल के जरिए स्पष्टीकरण देने की मांग की गई थी, जिसके बाद बुलंदशहर के डीएम को जांच के निर्देश दिए गए।
बिहार के रंजीत का दावा निकला गलत
बिहार के शेखपुरा निवासी रंजीत कुमार ने दावा किया कि उन्हें यूपीएससी में 440वीं रैंक मिली है। लेकिन जांच में पता चला कि इस रैंक पर चयन कर्नाटक के रंजीथ कुमार का हुआ है।
नाम की समानता का फायदा उठाकर दावा करने वाले रंजीत से जब दस्तावेज मांगे गए, तो वह गायब हो गया। फिलहाल प्रशासन उसकी तलाश कर रहा है।
प्रियंका चौधरी को लेकर भी हुआ भ्रम
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली प्रियंका चौधरी ने भी यूपीएससी में 79वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था। जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि यह रैंक हिमाचल प्रदेश की प्रियंका चौधरी को मिली है। गाजीपुर की प्रियंका पहले ही जीएसटी इंस्पेक्टर के पद पर चयनित हो चुकी हैं और वर्तमान में प्रयागराज में कार्यरत हैं।
आकांक्षा सिंह के नाम पर भी हुआ विवाद
301वीं रैंक को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर और बिहार के आरा की दो अलग-अलग आकांक्षा सिंह ने यूपीएससी पास करने का दावा किया था। जांच के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि गाजीपुर (यूपी) की आकांक्षा सिंह का चयन हुआ है, जबकि बिहार की आकांक्षा का दावा गलत पाया गया।