नलकूप से नहर तक: मालवा के खेतों को नई उम्मीद - जहां सूखते थे खेत, वहां बहेगी नहर
नहर के निर्माण से किसानों को डीज़ल और बिजली पर होने वाले खर्च से राहत मिलेगी। साथ ही, भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन भी रुकेगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए ...और पढ़ें
Publish Date: Fri, 23 Jan 2026 03:40:18 PM (IST)Updated Date: Fri, 23 Jan 2026 03:41:23 PM (IST)
पंजाब के मालवा में नहर परियोजनाएं।दक्षिणी पंजाब का मालवा क्षेत्र लंबे समय से गिरते भूजल स्तर और महंगे ट्यूबवेल सिंचाई संकट से जूझ रहा है। ऐसे में 2300 करोड़ की लागत से बनने वाली यह 149 किलोमीटर लंबी मालवा नहर परियोजना किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।
करीब 2 लाख एकड़ कृषि भूमि को नहरी पानी मिलने से खेती की लागत घटेगी और फसलों की पैदावार बढ़ेगी। मुक्तसर, बठिंडा, मानसा, संगरूर, बरनाला, फरीदकोट और फिरोजपुर जैसे जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
हालांकि भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ गांवों में शुरुआती आपत्तियां सामने आईं, लेकिन एसआईए रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि परियोजना सार्वजनिक हित में है। सरकार का दावा है कि किसानों को उचित मुआवज़ा और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत भूमि अधिग्रहण किया जाएगा।
नहर के निर्माण से किसानों को डीज़ल और बिजली पर होने वाले खर्च से राहत मिलेगी। साथ ही, भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन भी रुकेगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है।
पर्यावरण को लेकर उठी चिंताओं पर सरकार का कहना है कि जहां पेड़ों को हटाना जरूरी होगा, वहां प्रतिपूरक पौधारोपण भी किया जाएगा।
किसानों का मानना है कि यदि परियोजना तय समय पर पूरी हुई, तो मालवा की खेती एक बार फिर समृद्ध हो सकती है। यह नहर केवल पानी नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा लेकर आएगी।