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E20 पेट्रोल पर सरकार ने दूर किया बड़ा भ्रम, बताया कम हो सकता है आपकी कार का माइलेज

सरकार ने स्पष्ट किया कि E-20 पेट्रोल को सीधे माइलेज घटने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। रखरखाव, ड्राइविंग, ट्रैफिक, टायर प्रेशर और AC भी प्रभाव...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 16 Aug 2026 08:22:29 AM (IST)Updated Date: Sun, 16 Aug 2026 08:39:45 AM (IST)
E20 पेट्रोल पर सरकार ने दूर किया बड़ा भ्रम, बताया कम हो सकता है आपकी कार का माइलेज
E20 पेट्रोल पर सरकार ने दूर किया बड़ा भ्रम।

HighLights

  1. सरकार ने E-20 पेट्रोल से इंजन नुकसान की बात नकारी।
  2. कम टायर प्रेशर से भी माइलेज प्रभावित हो सकता।
  3. माइलेज पर वाहन रखरखाव और ड्राइविंग स्टाइल असर डालते हैं।

डिजिटल डेस्क। क्या ई-20 (E-20) पेट्रोल भरवाने से आपकी गाड़ी का माइलेज कम हो रहा है? अगर आपको भी ऐसा लगता है, तो केंद्र सरकार ने इस पर एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने साफ किया है कि वाहनों के माइलेज में आने वाली गिरावट के लिए केवल ई-20 पेट्रोल को दोष नहीं दिया जा सकता।

इसके अलावा, देश की प्रमुख तेल कंपनियों ने भी उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें ई-20 पेट्रोल में पानी (नमी) या अधिक क्लोराइड होने की बात कही जा रही थी।

माइलेज घटने के पीछे क्या हैं असली कारण?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी देते हुए बताया कि ई-20 ईंधन का पूरी तरह से परीक्षण किया गया है और इसका इंजन पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।

सरकार के मुताबिक, किसी भी वाहन का माइलेज कई बाहरी और तकनीकी कारणों पर निर्भर करता है, जैसे:

  • गाड़ी का सही से रखरखाव (Maintenance) न होना।
  • खराब ड्राइविंग स्टाइल।
  • भारी ट्रैफिक वाले इलाकों में गाड़ी चलाना।
  • टायरों में हवा (Tyre Pressure) का कम होना।
  • एयर कंडीशनर (AC) का लगातार और ज्यादा इस्तेमाल।

नोट: हालांकि, सरकार ने पूर्व में यह जरूर माना था कि कुछ विशेष वाहनों में ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत तक का मामूली अंतर आ सकता है।

ईंधन में पानी और क्लोराइड के दावे निकले झूठे

इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी दिग्गज तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने देश भर में पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर एक सघन जांच अभियान चलाया था।

क्लोराइड की मात्रा: रिफाइनरियों से लिए गए 100 से ज्यादा सैंपल्स में क्लोराइड का स्तर मात्र 1 पीपीएम (भाग प्रति मिलियन) या उससे भी कम मिला। वहीं, 80 डिस्टिलरियों और 80 से ज्यादा डिपो/टर्मिनल्स से लिए गए नमूनों में भी यह स्तर तय मानक (3 पीपीएम) से काफी नीचे पाया गया।


भंडारण टैंकों की जांच: कंपनियों ने यह भी स्पष्ट किया कि देशभर के करीब 90,000 पेट्रोल पंपों के अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंकों की जांच की गई, जिसमें किसी भी टैंक में पानी मिलने का कोई मामला सामने नहीं आया।

मिलावट पर सरकार की सख्त नजर

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी इस मामले पर स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि तेल कंपनियों द्वारा रिटेल पेट्रोल पंपों पर गहन चेकिंग अभियान चलाया गया है। इस दौरान ईंधन में मिलावट के इक्का-दुक्का मामले ही सामने आए हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

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