भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक FTA पर मुहर, व्यापार होगा दोगुना, चमड़ा से लेकर कपड़ा तक क्या-क्या होगा सस्ता?
भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को अपने आर्थिक रिश्तों की नई इबारत लिखते हुए मुक्त व्यापार समझौते (India New Zealand FTA) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 27 Apr 2026 04:00:24 PM (IST)Updated Date: Mon, 27 Apr 2026 04:00:24 PM (IST)
भारत-न्यूजीलैंड आर्थिक संबंधों का अध्याय।HighLights
- भारत-न्यूजीलैंड आर्थिक संबंधों का अध्याय
- मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर लगी मुहर
- द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य
डिजिटल डेस्क। भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) संपन्न हुआ, जिसने दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक नए युग की नींव रखी है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते का मुख्य लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना और भारत में 20 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश आकर्षित करना है।
किसे मिलेगा फायदा?
इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में मिलने वाली शुल्क-मुक्त (Duty-Free) पहुंच है।
- चमड़ा और आगरा का योगदान: मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, यह डील आगरा के चमड़ा निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। अब भारत से जाने वाला चमड़ा, बिना किसी आयात शुल्क के न्यूजीलैंड के बाजार में उपलब्ध होगा।
- अन्य क्षेत्र: कपड़ा, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामान जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों को भी इस शुल्क कटौती से जबरदस्त बढ़त मिलेगी।
- वाइन और स्पिरिट: भारत से निर्यात होने वाली वाइन को न्यूजीलैंड में बिना किसी शुल्क के प्रवेश मिलेगा, जबकि न्यूजीलैंड की वाइन पर भारत 10 साल की अवधि में धीरे-धीरे शुल्क कम करेगा।
कुशल पेशेवरों के लिए वर्किंग वीजा
सेवा क्षेत्र में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। समझौते के तहत अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा की व्यवस्था की गई है। इसके माध्यम से:
- प्रतिवर्ष 5,000 कुशल भारतीय पेशेवर (जैसे IT एक्सपर्ट, शिक्षक और इंजीनियर) न्यूजीलैंड में तीन साल तक काम कर सकेंगे।
- IT, शिक्षा, पर्यटन और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
कृषि रियायतें और घरेलू हितों की सुरक्षा
भारत ने रणनीतिक रूप से अपने 70% टैरिफ लाइनों को न्यूजीलैंड के लिए खोला है, जिससे सेब, कीवी और शहद जैसे उत्पादों पर शुल्क में रियायत मिलेगी। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील घरेलू बाजारों, विशेषकर डेयरी और कृषि सेक्टर की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा है।
सुरक्षित रखी गई वस्तुओं की सूची (Negative List):
- दूध, क्रीम, दही और पनीर जैसे डेयरी उत्पाद।
- प्याज, चना, मटर, मक्का और बादाम।
- हथियार, गोला-बारूद और रत्न-आभूषण।
एक दशक लंबा सफर
भारत-न्यूजीलैंड व्यापार वार्ता का इतिहास काफी लंबा रहा है। इसकी शुरुआत 2010 में हुई थी, लेकिन नौ दौर की बातचीत के बाद 2015 में इसे रोक दिया गया था। मार्च 2025 में नए सिरे से शुरू हुई वार्ता ने गति पकड़ी और दिसंबर 2025 में इसके सफल परिणाम की घोषणा की गई, जो अब आधिकारिक हस्ताक्षर के साथ धरातल पर आ गई है।
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व्यापार का वर्तमान स्वरूप
वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.3 अरब डॉलर का रहा, जिसमें भारत का पलड़ा भारी था (निर्यात: 711 मिलियन डॉलर बनाम आयात: 587 मिलियन डॉलर)। इस नए समझौते के साथ अब इस आंकड़े के कई गुना बढ़ने की संभावना है।