
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने समुद्री क्षेत्र में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए) (DGMA) ने एक आधिकारिक निर्देश जारी कर जहाज मालिकों, प्रबंधकों और क्रू भर्ती करने वाली कंपनियों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की तैनाती तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया है।
यह आपातकालीन फैसला पिछले तीन दिनों के भीतर फारस की खाड़ी के इस अशांत इलाके में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए सिलसिलेवार हमलों के बाद आया है, जिसमें दो भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई थी। इन घटनाओं ने संघर्ष क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले नाविकों के जीवन के जोखिम को अत्यधिक बढ़ा दिया है।
डीजीएमए द्वारा जारी परिपत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा नाजुक सुरक्षा स्थिति को देखते हुए भारतीय समुद्री कार्यबल के हितों की रक्षा के लिए यह एहतियाती कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था। यह प्रतिबंध अगले आदेश तक जारी रहेगा।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारत तीसरा सबसे बड़ा समुद्री जनशक्ति प्रदाता देश है, जिसके 3 लाख से अधिक नाविक दुनिया भर के जहाजों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नियामक ने सभी शिपिंग कंपनियों को फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा हालातों के प्रति बेहद सतर्क रहने और नौवहन चेतावनियों पर लगातार नजर रखने की हिदायत दी है।
महानिदेशालय ने भरोसा दिलाया है कि वह बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहा है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।