SIR पर खरगे का चुनाव आयोग पर हमला, CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग; कांग्रेस ने रखीं 5 बड़ी मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने SIR और वोटर रजिस्ट्रेशन नियमों पर चुनाव आयोग को घेरा। CWC बैठक में उन्होंने पारदर्शिता, डेटा उपलब्धता, अपील और स...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 02:49:00 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 02:49:00 PM (IST)
SIR पर खरगे का चुनाव आयोग पर हमला। (फाइल फोटो)HighLights
- खरगे ने SIR प्रक्रिया और वोटर रजिस्ट्रेशन नियमों पर सवाल उठाए
- कांग्रेस ने चुनावी डेटा सार्वजनिक करने की मांग रखी
- हटाए गए मतदाताओं को अपील का अवसर देने मांग
डिजिटल डेस्क। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और वोटर रजिस्ट्रेशन के नियमों में हुए बदलावों को चुनावी निष्पक्षता के लिए खतरा बताया है।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी लोकतंत्र और संविधान बचाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त तथा केंद्र सरकार के खिलाफ अपना अभियान और तेज करेगी। खरगे ने मौजूदा हालात की तुलना ब्रिटिश काल में वोटिंग अधिकारों के लिए लड़ी गई कांग्रेस की लड़ाई से की।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने का आरोप और चुनाव आयोग की सफाई
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा के इशारे पर लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को सरकार की कठपुतली करार दिया। वहीं, दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके सभी कदम कानूनी रूप से सही हैं और आयुक्तों के बीच वैचारिक मतभेद होना महज एक सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।
'युवाओं के सवालों से डरती है सरकार', फॉर्म 6 पर उठाए सवाल
नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर भी खरगे ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका तर्क है कि ये बदलाव युवाओं को उनके मताधिकार से वंचित करने की एक कोशिश हैं। साल 1988 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा वोटिंग की उम्र 21 से 18 वर्ष किए जाने का ऐतिहासिक हवाला देते हुए खरगे ने कहा कि मौजूदा सरकार युवाओं को रोजगार देने में नाकाम रही है। अब वह उनके सवालों से घबराकर उन्हें वोटिंग के अधिकार से भी दूर रखना चाहती है।
राहुल गांधी के दावों का समर्थन और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर संदेह
खरगे ने वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों को लेकर राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा, महादेवपुरम और आलंद जैसे क्षेत्रों में एक ही पते पर कई वोटर, संदिग्ध पतों और डुप्लीकेट वोटरों के मामलों पर चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। अगर आयोग ने समय रहते सख्ती दिखाई होती, तो आज उसकी साख पर सवाल नहीं उठते। इसके साथ ही उन्होंने एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर संदेह जताते हुए पूछा कि आखिर इसे किसने मंजूरी दी और दो अन्य चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से दूर क्यों रखा गया?
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें
सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने पांच सूत्रीय मांगें सामने रखी हैं:
- वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक हो और जिन लोगों के नाम कटे हैं, उन्हें इसकी सूचना देकर अपील का मौका मिले।
- सभी राजनीतिक दलों को समय पर और आसान फॉर्मेट में वोटर लिस्ट का डेटा उपलब्ध कराया जाए।
- सामने आई गंभीर गड़बड़ियों की एक तय समय-सीमा के भीतर स्वतंत्र जांच करवाई जाए।
- चुनावी फैसले और डेटा पूरी तरह पारदर्शी हों, ताकि कोई भी जानकारी छिपाने का आरोप न लगे।
- सबसे जरूरी, देश के मतदाताओं में यह विश्वास कायम हो कि उनका वोट पूरी तरह से सुरक्षित है।
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'वोट की नोटबंदी' का दिया नारा, मांगा पीएम का इस्तीफा
- भाजपा और आरएसएस पर संवैधानिक संस्थाओं को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाते हुए खरगे ने कहा कि चुनाव आयोग ऐसा होना चाहिए जिस पर सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों को पूरा भरोसा हो। उन्होंने दावा किया कि खुद दो चुनाव आयुक्तों ने सीईसी के रवैये को अनुचित और मनमाना बताया है।
- इस पूरे विवाद को 'वोट की नोटबंदी' की संज्ञा देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नोटबंदी में गरीब लाइनों में लगे थे, लेकिन इस 'वोट नोटबंदी' में तो उन्हें लाइन से ही बाहर कर दिया गया है। सीईसी पर दबाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग भी कर डाली।
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