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सोनिया गांधी को बड़ा झटका, वोटर लिस्ट में नाम को लेकर कोर्ट ने रद किया मजिस्ट्रेट का आदेश, दोबारा होगी सुनवाई

Sonia Gandhi Voter List Case: वर्ष 1980 में यानी भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से तीन साल पूर्व मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के मामले में दिल्ली की र...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 04:47:05 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 04:47:05 PM (IST)
सोनिया गांधी को बड़ा झटका, वोटर लिस्ट में नाम को लेकर कोर्ट ने रद किया मजिस्ट्रेट का आदेश, दोबारा होगी सुनवाई
नागरिकता मिलने से पहले नाम जुड़वाने का आरोप।

HighLights

  1. नागरिकता मिलने से पहले नाम जुड़वाने का आरोप
  2. विशेष अदालत ने एसीएमएम कोर्ट को भेजा मामला
  3. FIR याचिका पर पुलिस-पक्षों को सुनकर होगा निर्णय

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। वर्ष 1980 में यानी भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से तीन साल पूर्व मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। विशेष अदालत ने सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की याचिका को खारिज करने वाले मजिस्ट्रेट कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है।

जाली कागजात के जरिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का आरोप

अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने 1983 में आधिकारिक रूप से भारतीय नागरिकता हासिल की थी। हालांकि, आरोप है कि उन्होंने 1980 में ही कथित रूप से फर्जी एवं जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करवा लिया था। इसी विषय को लेकर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था।


विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को बताया आधारहीन

मामले की समीक्षा करते हुए विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का पूर्व आदेश न्यायसंगत नहीं था, क्योंकि उसमें याचिका को खारिज करने के ठोस और स्पष्ट कारण प्रस्तुत नहीं किए गए थे। विशेष अदालत ने माना कि आदेश बिना किसी उचित आधार के पारित किया गया था, इसलिए इसे कायम नहीं रखा जा सकता।

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एसीएमएम कोर्ट को पुनरावलोकन और सुनवाई के निर्देश

विशेष न्यायाधीश ने इस पूरे प्रकरण को वापस एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (ACMM) की अदालत में भेज दिया है। अदालत को निर्देश दिए गए हैं कि वह याचिकाकर्ता और बचाव पक्ष—दोनों पक्षों के तर्कों को ध्यानपूर्वक सुने। इसके साथ ही, मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पुलिस अधिकारी का रुख व पक्ष जानने के बाद ही एक विस्तृत, तर्कपूर्ण और वैधानिक आदेश पारित करे।