
डिजिटल डेस्क, मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा इलाके में स्थित शहर के बड़े प्रसाद हॉस्पिटल में गुरुवार सुबह दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू (ICU) वार्ड में अचानक भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। इस हादसे में अब तक पांच मरीजों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, वहीं 30 से ज्यादा इस दुर्घटना में घायल बताए जा रहे हैं।
शुरुआती जांच के अनुसार, आग लगने का मुख्य कारण आईसीयू वार्ड में हुआ शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिजनों का आरोप है कि सुबह करीब तीन बजे जैसे ही आग भड़की, अस्पताल में चीख-पुकार मच गई। ऐसे संवेदनशील समय पर मरीजों की जान बचाने के बजाय अस्पताल के चिकित्सक, नर्स और अन्य स्टाफ उन्हें उनके हाल पर छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए। जब दमकल विभाग की टीम वहां पहुंची, तब भी अधिकांश स्टाफ नदारद था, जिसने प्रबंधन की क्रूर लापरवाही को उजागर किया है।

घटना की सूचना मिलते ही जिला मजिस्ट्रेट (DM) सुब्रत कुमार सेन, एसएसपी और दमकल विभाग की लगभग एक दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। पांचवें फ्लोर पर आईसीयू होने और चारों तरफ जहरीला धुआं फैलने के कारण बचाव कार्य में भारी मशक्कत करनी पड़ी। दमकल कर्मियों ने अस्पताल की खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर 20 से अधिक मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें तुरंत आसपास के अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया। करीब एक घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।

डीएम सुब्रत कुमार सेन ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि अस्पताल के जिस आईसीयू वार्ड में आग लगी, वहां कुल 13 बेड की क्षमता थी, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर 15 मरीजों को भर्ती किया गया था। इस हादसे में अब तक 3 मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि आईसीयू वार्ड के इंचार्ज भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
परिजनों के अनुसार, अस्पताल का फायर कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह फेल था और आपातकालीन सीढ़ी का मुख्य गेट भी बंद था, जिससे रेस्क्यू में बाधा आई। फिलहाल प्रशासन ने पूरे अस्पताल परिसर को अपने कब्जे में ले लिया है और साक्ष्य जुटाकर मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।
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