
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मानसून (Monsoon Update) का इंतजार अभी कुछ और लंबा हो सकता है। मौसम विभाग (IMD Weather Farecast) के अनुसार छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब 18 जून तक प्रवेश कर सकता है। इससे पहले विभाग ने 12 जून तक मानसून पहुंचने का अनुमान जताया था, लेकिन मौसम प्रणालियों की धीमी सक्रियता और अनुकूल परिस्थितियां पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण इसकी रफ्तार सुस्त पड़ गई है।
फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं। इसके प्रभाव से कई इलाकों में हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी है। रायपुर समेत मध्य छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में उमस और गर्मी से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी दिनों में मानसून की गति तेज हो सकती है और बस्तर संभाग के रास्ते इसकी औपचारिक एंट्री होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले पांच दिनों तक खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके साथ मेघ गर्जन और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है।
दैनिक मौसम परिचर्चा (14.06.2026)
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और असम और मेघालय में अगले 6-7 दिनों के दौरान कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है।
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— India Meteorological Department (@Indiametdept) June 14, 2026
कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बिजली गिरने और तेज हवा के दौरान खुले स्थानों में नहीं जाने की चेतावनी भी दी गई है।
छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर बस्तर संभाग के रास्ते प्रवेश करता है। इसके बाद मानसून धीरे-धीरे रायपुर समेत पूरे प्रदेश में आगे बढ़ता है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस बार बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत में बने मौसम सिस्टम का असर प्रदेश के मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है।

दक्षिण छत्तीसगढ़ में मानसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने लगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री हवाओं की सक्रियता बढ़ी तो अगले कुछ दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश शुरू हो सकती है।
इस बार मानसून की शुरुआत भी सामान्य से धीमी रही। आमतौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस वर्ष यह तीन दिन की देरी से 4 जून को केरल तट पर पहुंचा।
इसके बाद मानसून ने धीरे-धीरे उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों के साथ केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गोवा, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और झारखंड तक अपनी पहुंच बना ली। हालांकि मध्य भारत के कई हिस्सों में इसकी रफ्तार अभी धीमी बनी हुई है।
भारत मौसम विभाग के अनुसार अगले छह से सात दिनों के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
मौसम विभाग लगातार इन क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में सक्रिय मानसून सिस्टम का असर आने वाले दिनों में मध्य भारत के मौसम पर भी दिखाई दे सकता है।
इस बार मानसून पर सुपर अल नीनो का खतरा भी मंडरा रहा है। मौसम विभाग पहले ही सामान्य से कम बारिश की आशंका जता चुका है। अल नीनो की स्थिति बनने से तापमान बढ़ने और वर्षा में कमी आने की संभावना रहती है।
12 जून को मौसम विभाग ने आधिकारिक तौर पर प्रशांत महासागर के ऊपर अल नीनो जैसे हालात बनने की पुष्टि की थी। विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच इसका प्रभाव चरम पर पहुंच सकता है। यही वह समय होता है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में सबसे अधिक बारिश लेकर आता है।
यदि अल नीनो का असर बढ़ता है तो इसका प्रभाव खेती, जलस्तर और बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। कम बारिश होने की स्थिति में फसलों के सूखने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ सकती है।