
डिजिटल डेस्क। देश के ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ 'गोबरधन योजना' को व्यापक रूप से लागू करने की स्वीकृति दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि अवशेषों, पशुओं के गोबर और शहरी जैविक कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का निर्माण करना है।
अगले 10 वर्षों के लिए तैयार किए गए इस रोडमैप के तहत देश में स्वच्छ और हरित ईंधन के उत्पादन को 10 गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल खेतों की पराली और गोबर के निस्तारण में मदद मिलेगी, बल्कि किसान और ग्रामीण उद्यमी सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ सकेंगे।
इस योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि बायोगैस उत्पादकों को अपना माल बेचने के लिए बाजार तलाशने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार ने 'सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन' (CGD) कंपनियों के लिए बायोगैस खरीदना अनिवार्य कर दिया है।
बाजार के उतार-चढ़ाव से निवेशकों को बचाने के लिए सरकार ने अगले 10 वर्षों के लिए सीबीजी का एक निश्चित मूल्य तय किया है। उत्पादकों को 2,110 रुपये प्रति MMBTU की दर से भुगतान किया जाएगा, जिससे निवेशकों को दीर्घकालिक आय का आश्वासन मिलेगा।
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नया प्लांट स्थापित करने या मौजूदा क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करेगी:
प्लांट संचालकों को गैस बिक्री के साथ-साथ उप-उत्पाद के रूप में मिलने वाली जैविक खाद (Organic Fertilizer) से भी अतिरिक्त आय होगी। बायोगैस निर्माण के बाद बचा अवशेष मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए अत्यधिक उपयोगी होता है, जिसे किसानों को बेचकर अतिरिक्त मुनाफा कमाया जा सकेगा।