
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (एक देश, एक चुनाव) को लेकर देश में बहस तेज है। इसी सिलसिले में वन नेशन वन इलेक्शन के लिए बनाई गई संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के अध्यक्ष और सांसद डॉ. पी. पी. चौधरी ने इसके दूरगामी फायदों को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उनका कहना है कि अगर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाते हैं, तो इससे न सिर्फ देश की तिजोरी को भारी फायदा होगा, बल्कि बच्चों की शिक्षा और राज्यों का विकास भी प्रभावित नहीं होगा।
संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष डॉ. पी. पी. चौधरी के मुताबिक, देश में बार-बार चुनाव होने से सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता है। यदि देश में एक साथ चुनाव कराए जाएं, तो देश की जीडीपी (GDP) का करीब 1.6 फीसदी यानी लगभग 7 लाख करोड़ रुपये बचाया जा सकता है। इस भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल देश के विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनहित की योजनाओं में किया जा सकेगा।
अक्सर देखा जाता है कि देश में चाहे आम चुनाव हों, विधानसभा चुनाव हों या जनगणना जैसे अभियान, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को बड़े पैमाने पर इन कामों में ड्यूटी पर लगा दिया जाता है।
बार-बार चुनाव होने और आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने के कारण केंद्र और राज्य सरकारों के कई जनहित से जुड़े फैसले और विकास कार्य अटक जाते हैं। मंत्रियों और आला अधिकारियों को चुनावी तैयारियों और रैलियों में व्यस्त रहना पड़ता है, जिससे प्रशासनिक कामकाज धीमा हो जाता है। एक ही बार चुनाव होने से प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और सरकारें बिना किसी रुकावट के देशहित और विकास कार्यों पर ध्यान दे सकेंगी।
संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के समक्ष उत्तराखंड सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उत्तराखंड का लगभग 43 फीसदी राजस्व (Revenue) पर्यटन से आता है, लेकिन चुनावी वर्ष में पाबंदियों और आचार संहिता के कारण पर्यटन व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होता है।
डॉ. पी. पी. चौधरी ने बताया कि इस विषय पर उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) और उच्च न्यायालयों (High Courts) के पूर्व न्यायाधीशों से भी विस्तृत चर्चा की गई थी। सभी कानूनी विशेषज्ञों ने एक सुर में माना कि 'एक देश, एक चुनाव' की व्यवस्था से...
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