मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाले प्रस्ताव के लिए विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा में लाएगा नया नोटिस
विपक्षी दल अगले कुछ दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नया नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं।
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 07:10:50 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 07:27:10 PM (IST)
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ।HighLights
- विपक्षी पार्टियों द्वारा नोटिस का मसौदा तैयार किया जा रहा
- इंडिया ब्लॉक के सहयोगी नोटिस पर एक साथ काम कर रहे
- विपक्ष का ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने का तीसरा प्रयास
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विपक्षी दल अगले कुछ दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नया नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने का यह विपक्ष का तीसरा प्रयास होगा।
पहले प्रयास में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रस्तुत नोटिस खारिज कर दिया गया था।
विपक्ष द्वारा नोटिस का मसौदा तैयार किया जा रहा
बताया जा रहा है कि विपक्ष द्वारा नोटिस का मसौदा तैयार किया जा रहा है और संसद के दोनों सदनों में जमा करने से पहले इसे कानूनी विशेषज्ञों द्वारा जांचा जाएगा। ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर 24 अप्रैल को 73 विपक्षी सांसदों द्वारा दिया गया नोटिस राज्यसभा में लंबित है।
इंडिया ब्लॉक के सहयोगी नोटिस पर एक साथ काम कर रहे
इंडिया ब्लॉक के सहयोगी ताजा नोटिस पर एक साथ काम कर रहे हैं। यह कदम इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में रिकॉर्ड पर कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी।
ये उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए थे। जबकि एसआईआर का राष्ट्रीय रोलआउट पूर्ण आयोग की देखरेख में था। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी आपत्तियों में वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म 6 में संशोधन के तरीके, मतदाता सूचियों में जोड़ने, हटाने की प्रक्रिया और मतदाता सूची डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण शामिल था।
अलग-अलग विचार और टिप्पणियां विमर्श का सामान्य हिस्सा
एसआईआर प्रक्रिया पर अपने दो आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों को लेकर आलोचना झेल रहे चुनाव आयोग ने बुधवार को कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श का एक सामान्य हिस्सा हैं और इसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी मंजूरी मिलती है और स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।