
डिजिटल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। दोनों देशों के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद दुनिया भर के नेताओं ने इसका स्वागत किया है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पहल को सकारात्मक बताते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का वह स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ। मोदी ने उम्मीद जताई कि इस समझौते से क्षेत्र में शांति बहाल होगी तथा व्यापार और आवागमन की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सकेगी।
अमेरिका और ईरान ने तीन महीने से अधिक समय से चल रहे विवाद को समाप्त करने के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा की है। दोनों देशों ने पुष्टि की है कि 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह समझौता क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में सैन्य अभियानों को समाप्त करना, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाना शामिल है। वहीं ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को भविष्य की बातचीत के लिए छोड़ा है। मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि दोनों पक्ष लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी युद्धविराम के लिए सहमत हो गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस समझौते को बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है और इसके तहत होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी शुल्क के खोलने तथा अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी तत्काल हटाने की मंजूरी दी गई है। ट्रंप ने इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।