
डिजिटल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। देश के नाम संबोधन में उन्होंने कहा कि संसद में जो हुआ, उसने देश की नारी शक्ति की उम्मीदों को आहत किया है और यह महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है।
PM मोदी के संबोधन की 5 बड़ी बातें:
1. महिलाओं के सपनों को कुचल दिया गया
प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि कैसे नारी शक्ति की उड़ान को रोका गया और उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया।
2. विपक्ष ने तालियां बजाकर जश्न मनाया
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने महिला आरक्षण प्रस्ताव गिरने पर खुशी जताई और मेजें थपथपाईं।
3. नारी अपमान कभी नहीं भूलती
पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष का यह व्यवहार सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वाभिमान पर चोट है, जिसे देश की महिलाएं लंबे समय तक याद रखेंगी।
4. विपक्ष को सजा जरूर मिलेगी
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की नारी सब देख रही है और महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को जनता जवाब देगी।
5. परिवारवादी राजनीति और कुतर्क जिम्मेदार
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि परिवारवादी दल महिलाओं के बढ़ते राजनीतिक कद से डरते हैं और तकनीकी बहानों व कुतर्कों के जरिए उनके अधिकारों को रोकते रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “मेरे लिए देशहित सर्वोपरि है। हम पूरी कोशिश के बावजूद महिला आरक्षण बिल को पारित नहीं करा सके, इसके लिए मैं देश की माताओं-बहनों से क्षमा चाहता हूं।”
उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों को भी जिम्मेदार ठहराया। पीएम ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों की राजनीति के कारण यह बिल पास नहीं हो सका, जिसका नुकसान देश की महिलाओं को उठाना पड़ा।
नारी अपमान नहीं भूलती हैं
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 'नारी अपना अपमान कभी नहीं भूलती। महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करके विपक्ष ने जो पाप किया है, उसकी सजा उन्हें जरूर मिलेगी।'
My address to the nation. https://t.co/2Vyx15A4rx
— Narendra Modi (@narendramodi) April 18, 2026
विपक्ष का रवैया महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के खिलाफ
देश के नाम संबोधन में उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष का रवैया महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के खिलाफ था। प्रधानमंत्री ने कहा, “विपक्ष महिलाओं से उनका अधिकार छीनकर मेज थपथपा रहा था। यह सिर्फ टेबल पर थाप नहीं थी, बल्कि नारी के स्वाभिमान पर चोट थी।”
#WATCH | In his address to the nation, Prime Minister Narendra Modi says, "Nation’s welfare is our priority, but when political benefit becomes the priority for some people, even bigger than the nation’s welfare, the women of the country have to bear the burden for this. The same… pic.twitter.com/mAxFkMPYT7
— ANI (@ANI) April 18, 2026
उन्होंने आगे कहा कि नारी अपमान को कभी नहीं भूलती और यह घटना लंबे समय तक महिलाओं के मन में बनी रहेगी। पीएम मोदी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद में जो हुआ, उसकी कसक देश की महिलाओं के मन में रहेगी। उन्होंने कहा, “जब देश की नारी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो उसे याद आएगा कि इन्हीं लोगों ने महिला आरक्षण रुकने पर जश्न मनाया था।”
कांग्रेस पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर तीखा हमला बोला। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संशोधन 40 साल से लंबित महिलाओं के अधिकारों को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम था, जिसके जरिए 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं को उनका अधिकार देने की कोशिश की जा रही थी।
उन्होंने इसे महिलाओं के लिए नए अवसर, नई उड़ान और बाधाएं हटाने का प्रयास बताते हुए कहा कि यह देश की आधी आबादी को बराबरी का अधिकार दिलाने की ईमानदार पहल थी।
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "पर्सनली, मुझे उम्मीद थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेगी, अपने पापों का प्रायश्चित करेगी। लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने और महिलाओं के सपोर्ट में खड़े होने का मौका खो दिया। कांग्रेस देश के ज़्यादातर इलाकों में अपना वजूद खो चुकी है। एक पैरासाइट की तरह, कांग्रेस रीजनल पार्टियों की सवारी करती है और खुद को ज़िंदा रखती है। लेकिन कांग्रेस यह भी नहीं चाहती कि रीजनल पार्टियां और मज़बूत हों। इसलिए, उसने इस अमेंडमेंट का विरोध करवाकर कई रीजनल पार्टियों का भविष्य अंधेरे में धकेलने की पॉलिटिकल साज़िश रची।"
महिला शक्ति को समान रूप से मजबूत करना था
पीएम मोदी ने कहा कि यह बिल समय की मांग था और इसका उद्देश्य उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक सभी राज्यों की महिला शक्ति को समान रूप से मजबूत करना था, ताकि हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इस पहल को संसद में रोक दिया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यह कदम देश के सामने महिलाओं के अधिकारों को कुचलने जैसा है।
खानदानी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं
देश के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "... मुझे यह देखकर बहुत दुख हुआ कि जब महिलाओं की भलाई का यह प्रस्ताव गिरा, तो कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी पार्टी जैसी खानदानी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं। ये लोग महिलाओं के हक छीनकर मेज थपथपा रहे थे... यह महिलाओं की इज्ज़त और आत्म-सम्मान पर हमला था। और महिलाएं सब कुछ भूल जाती हैं, लेकिन अपनी बेइज्जती कभी नहीं भूलतीं। इसलिए, पार्लियामेंट में कांग्रेस और उसके साथियों के बर्ताव का दर्द हर महिला के दिल में हमेशा रहेगा। जब भी देश भर की महिलाएं इन नेताओं को अपने चुनाव क्षेत्रों में देखेंगी, तो उन्हें याद आएगा कि इन्हीं लोगों ने पार्लियामेंट में महिला रिजर्वेशन रोके जाने पर जश्न मनाया था और खुशियां मनाई थीं।"
सभी दलों और राज्यों के लिए एक बड़ा अवसर
उन्होंने कहा कि यह विधेयक सभी दलों और राज्यों के लिए एक बड़ा अवसर था, जिससे विभिन्न राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ सकती थी। प्रधानमंत्री के मुताबिक, अगर यह बिल पास हो जाता तो पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने का मौका मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने इस अवसर को गंवा दिया और अपने-अपने राज्यों के हितों को नुकसान पहुंचाया।
पीएम मोदी ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का नाम लेते हुए कहा कि इन दलों के पास अपने राज्यों और महिलाओं को आगे बढ़ाने का अवसर था, लेकिन उन्होंने इसका उपयोग नहीं किया।
समाजवादी पार्टी पर टिप्पणी
उन्होंने समाजवादी पार्टी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पार्टी अपनी छवि सुधारने का मौका भी चूक गई और महिला आरक्षण का विरोध करके समाजवादी विचारधारा के नेताओं के सपनों के विपरीत कदम उठाया।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने एक बार फिर खुद को “एंटी-रिफॉर्म” पार्टी साबित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस 21वीं सदी के भारत के निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों का विरोध करती रही है और यह उसकी पुरानी राजनीतिक प्रवृत्ति का हिस्सा है।
"देश की भलाई हमारी प्राथमिकता है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए राजनीतिक फ़ायदा देश की भलाई से भी बड़ा हो जाता है, तो इसका बोझ देश की महिलाओं को उठाना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ।"
"देश की 'नारी शक्ति' को कांग्रेस, DMK, TMC और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टियों की मतलबी राजनीति का बोझ उठाना पड़ा।"
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