राजा रघुवंशी मर्डर केस: सोनम रघुवंशी की जमानत पर अब 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को दी चुनौती
Raja Raghuvanshi Murder Case: कथित हनीमून मर्डर केस की आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट 21 जुलाई क...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 02:38:21 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 02:41:46 PM (IST)
HighLights
- शीर्ष कोर्ट बोला- कानूनी मुद्दे पर विस्तार से विचार किया जाएगा
- गिरफ्तारी मेमो की गलती बनी सोनम की जमानत का आधार
- जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने दायर की है याचिका
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कथित हनीमून मर्डर केस की आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट 21 जुलाई को सुनवाई करेगा। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दे पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
सुनवाई जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष हुई। मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की जल्द सुनवाई का अनुरोध किया, जबकि सोनम रघुवंशी की ओर से पेश वकील ने अगली सप्ताह सुनवाई का आग्रह किया। इसके बाद कोर्ट ने 21 जुलाई की तारीख तय कर दी।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली सोनम रघुवंशी पर आरोप है कि उसने वर्ष 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने कारोबारी पति राजा रघुवंशी की हत्या (Raja Raghuvanshi Murder Case) की साजिश रची। पुलिस के अनुसार, आर्थिक लाभ के उद्देश्य से सोनम ने कथित तौर पर किराए के हमलावरों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिलाया।
राजा और सोनम 23 मई 2025 को मेघालय के सोहरा क्षेत्र में घूमने गए थे, जहां दोनों लापता हो गए। बाद में 2 जून 2025 को राजा रघुवंशी का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ। इसके बाद जांच के दौरान सोनम को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी मेमो की गलती बनी जमानत का आधार
सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई की सुनवाई के दौरान संकेत दिया था कि वह इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर बड़ी पीठ के पास विचार भेज सकता है कि क्या गिरफ्तारी मेमो में गलत कानूनी धारा दर्ज होना, यदि वह केवल टाइपिंग या क्लेरिकल गलती हो, गिरफ्तारी को अवैध ठहराने और जमानत देने का पर्याप्त आधार हो सकता है। शीर्ष अदालत यह भी परखेगी कि क्या हाई कोर्ट द्वारा केवल इस तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देना न्यायसंगत था।
हाई कोर्ट ने क्यों दी थी राहत?
मेघालय हाई कोर्ट ने 29 जून को ट्रायल कोर्ट द्वारा 27 अप्रैल को दी गई जमानत को बरकरार रखा था। अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी के लिखित कारण तैयार करने में पुलिस ने पर्याप्त सावधानी नहीं बरती। दरअसल, गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या से संबंधित प्रावधान) की जगह धारा 403 का उल्लेख कर दिया गया था, जो इस मामले में लागू नहीं होती। हाई कोर्ट ने इसे गंभीर प्रक्रिया संबंधी त्रुटि माना और जमानत को सही ठहराया।
मेघालय सरकार का पक्ष
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि गिरफ्तारी मेमो में गलत धारा का उल्लेख केवल क्लेरिकल या टाइपिंग की त्रुटि थी। उनका कहना था कि इतनी तकनीकी गलती के आधार पर हत्या जैसे गंभीर मामले में गिरफ्तारी को अवैध मानना और आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है।
इससे पहले 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अब 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई में शीर्ष अदालत इस कानूनी प्रश्न पर महत्वपूर्ण फैसला लेने की दिशा में आगे बढ़ेगी।