
डिजिटल डेस्क। राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता क्षेत्र से कुदरत का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। करीब सवा साल (1 साल, 2 महीने और 21 दिन) पहले एक हादसे में जान गंवाने वाले दो घनिष्ठ दोस्तों का एक ही दिन पुनर्निमाण/पुनर्जन्म के रूप में नए जीवन की शुरुआत माना जा रहा है। इस अद्भुत संयोग ने दोनों शोक संतप्त परिवारों के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ा दी है।
यह पूरी घटना मेड़ता के पास स्थित मोकलपुर और सातलावास गांवों से जुड़ी है। 14 जुलाई 2025 को नरेंद्र बेड़ा और नरेंद्र मुंवाल अपने एक अन्य साथी प्रदीप विश्नोई के साथ चित्तौड़गढ़ के निलिया महादेव झरने में पिकनिक मनाने गए थे। इस दौरान अचानक हुए हादसे में तीनों दोस्त झरने में डूब गए और उनकी असमय मृत्यु हो गई।
हादसे के बाद नरेंद्र बेड़ा का पार्थिव शरीर उसी दिन मिल गया था, जिसके बाद 14 जुलाई को ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं दूसरे दोस्त नरेंद्र मुंवाल का शव लगभग 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मिला, जिससे उनका अंतिम संस्कार अगले दिन हो सका।
प्रकृति का अनोखा करिश्मा देखिए कि नरेंद्र बेड़ा की मां ने जिस समय नवजात को जन्म दिया, उसके ठीक 12 घंटे बाद नरेंद्र मुंवाल की मां की गोद भी बच्चे की किलकारी से गूंज उठी। दोनों परिवारों में महज 12 घंटे के अंतराल पर पुत्रों का जन्म हुआ है, जिसे ग्रामीण और परिजन दोनों दोस्तों का पुनर्जन्म मान रहे हैं।
हादसे से पहले दोनों माताओं ने नसबंदी का ऑपरेशन करवा लिया था। लेकिन अपने जवान बेटों को खोने के गहरे सदमे के बाद दोनों माताओं ने नसबंदी खुलवाने (ट्यूबेक्टमी रिवर्सल) का साहसिक फैसला लिया। हादसे के ठीक 1 साल, 2 महीने और 21 दिन बाद जब दोनों घरों में नन्हे मेहमानों ने कदम रखा, तो दोनों माताओं के चेहरे खिल उठे। इस अद्भुत संयोग की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है।
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