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E-20 पेट्रोल विवाद पर केंद्र सरकार का बड़ा कदम, पेट्रोल पंपों पर फिर मिल सकता है बिना इथेनॉल वाला सामान्य ईंधन, मंथन शुरू

उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती शिकायतों और सोशल मीडिया पर मिल रहे भारी विरोध के बीच केंद्र सरकार ईंधन नीति में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है।

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 07 Jul 2026 03:53:20 PM (IST)Updated Date: Tue, 07 Jul 2026 03:53:20 PM (IST)
E-20 पेट्रोल विवाद पर केंद्र सरकार का बड़ा कदम, पेट्रोल पंपों पर फिर मिल सकता है बिना इथेनॉल वाला सामान्य ईंधन, मंथन शुरू
शून्य इथेनॉल (Zero Ethanol) पेट्रोल का विकल्प की तैयारी।

HighLights

  1. माइलेज में कमी और इंजन की खराबी की शिकायतों का असर
  2. शून्य इथेनॉल (Zero Ethanol) पेट्रोल का विकल्प की तैयारी
  3. ईंधन चुनने की आज़ादी देने पर विचार कर रही हैं तेल कंपनियां

डिजिटल डेस्क। उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती शिकायतों और सोशल मीडिया पर मिल रहे भारी विरोध के बीच केंद्र सरकार ईंधन नीति में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल (E-20) की अनिवार्य बिक्री से पैदा हुई चिंताओं को देखते हुए, अब बिना मिश्रण वाले यानी 'जीरो इथेनोल' सामान्य पेट्रोल का विकल्प फिर से शुरू करने पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय, विभिन्न सरकारी विभागों और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के बीच इस प्रस्ताव को लेकर उच्च स्तरीय बैठकें शुरू हो चुकी हैं।

उपभोक्ताओं की शिकायतें

देशभर में E-20 पेट्रोल के लागू होने के बाद से ही वाहन मालिकों द्वारा माइलेज में भारी कमी और पुरानी गाड़ियों के इंजनों में खराबी की शिकायतें की जा रही थीं। शुरुआती हिचकिचाहट के बाद अब सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी यह स्वीकार किया है कि इथेनोल मिश्रण के कारण वाहनों के माइलेज में लगभग 6 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इसी असंतोष को दूर करने के लिए अब ग्राहकों को बिना मिलावट वाले ईंधन का विकल्प देने की योजना बनाई जा रही है।


सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां

इस नए विकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सरकार के सामने दो मुख्य पेच फंसे हुए हैं:

  • कीमत का पेंच (Pricing Dilemma): वर्तमान में बिकने वाले सामान्य पेट्रोल को तेल कंपनियां लागत से कम कीमत (अंडर-रिकवरी) पर बेच रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना इथेनोल वाले शुद्ध पेट्रोल की कीमत क्या रखी जाए? एक प्रस्ताव यह है कि शुद्ध पेट्रोल को उसकी वास्तविक (बिना किसी सब्सिडी वाली) पूरी कीमत पर बेचा जाए, जबकि E-20 पेट्रोल के दाम मौजूदा दर से थोड़े कम कर दिए जाएं, ताकि ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार ईंधन चुन सकें।
  • सप्लाई चेन और बुनियादी ढांचा (Infrastructure Cost): फिलहाल पेट्रोल पंपों पर केवल दो तरह के ईंधन—E-20 सामान्य पेट्रोल और प्रीमियम ब्रांडेड पेट्रोल—उपलब्ध होते हैं। तीसरा वैरिएंट (बिना इथेनोल वाला) जोड़ने के लिए पेट्रोल पंपों पर अतिरिक्त स्टोरेज टैंक और नए डिस्पेंसर (ईंधन भरने वाली मशीनें) लगाने होंगे, जिससे तेल कंपनियों की रखरखाव और स्टॉक मैनेजमेंट की लागत काफी बढ़ जाएगी।

E-25 ईंधन की एंट्री पर फिलहाल ब्रेक

पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा E-22 से लेकर E-30 तक के ईंधनों पर उत्पाद शुल्क में छूट देने और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा इनके मानक तय करने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही बाजार में E-25 (25% इथेनोल मिश्रण) पेट्रोल आ जाएगा। हालांकि, मौजूदा विवादों और लॉजिस्टिक दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने फिलहाल अधिक इथेनोल मिश्रण वाले ईंधन को बाजार में उतारने की योजना को टाल दिया है।

तय समय से पहले हासिल हुआ था लक्ष्य

भारत में इथेनोल ब्लेंडिंग का सफर बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। साल 2013-14 में जहां पेट्रोल में महज 1.5 फीसदी इथेनोल मिलाया जाता था, वहीं सरकार ने अभूतपूर्व तेजी दिखाते हुए साल 2025 में ही 20 प्रतिशत मिश्रण (E-20) का लक्ष्य हासिल कर लिया। गौरतलब है कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए पहले साल 2030 तक की समयसीमा तय की गई थी।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस त्वरित कदम से देश को करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण में कमी और किसानों की आय में बढ़ोतरी जैसे बड़े फायदे भी हुए हैं। लेकिन अब, बाजार और उपभोक्ताओं के जमीनी फीडबैक ने सरकार को अपनी 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' (सबके लिए एक नियम) नीति की समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को 'चुनने की आजादी' देने की ओर मोड़ दिया है।