
डिजिटल डेस्क। उपभोक्ताओं की लगातार बढ़ती शिकायतों और सोशल मीडिया पर मिल रहे भारी विरोध के बीच केंद्र सरकार ईंधन नीति में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रित पेट्रोल (E-20) की अनिवार्य बिक्री से पैदा हुई चिंताओं को देखते हुए, अब बिना मिश्रण वाले यानी 'जीरो इथेनोल' सामान्य पेट्रोल का विकल्प फिर से शुरू करने पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय, विभिन्न सरकारी विभागों और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के बीच इस प्रस्ताव को लेकर उच्च स्तरीय बैठकें शुरू हो चुकी हैं।
देशभर में E-20 पेट्रोल के लागू होने के बाद से ही वाहन मालिकों द्वारा माइलेज में भारी कमी और पुरानी गाड़ियों के इंजनों में खराबी की शिकायतें की जा रही थीं। शुरुआती हिचकिचाहट के बाद अब सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी यह स्वीकार किया है कि इथेनोल मिश्रण के कारण वाहनों के माइलेज में लगभग 6 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इसी असंतोष को दूर करने के लिए अब ग्राहकों को बिना मिलावट वाले ईंधन का विकल्प देने की योजना बनाई जा रही है।
इस नए विकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सरकार के सामने दो मुख्य पेच फंसे हुए हैं:
पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा E-22 से लेकर E-30 तक के ईंधनों पर उत्पाद शुल्क में छूट देने और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा इनके मानक तय करने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही बाजार में E-25 (25% इथेनोल मिश्रण) पेट्रोल आ जाएगा। हालांकि, मौजूदा विवादों और लॉजिस्टिक दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने फिलहाल अधिक इथेनोल मिश्रण वाले ईंधन को बाजार में उतारने की योजना को टाल दिया है।
भारत में इथेनोल ब्लेंडिंग का सफर बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। साल 2013-14 में जहां पेट्रोल में महज 1.5 फीसदी इथेनोल मिलाया जाता था, वहीं सरकार ने अभूतपूर्व तेजी दिखाते हुए साल 2025 में ही 20 प्रतिशत मिश्रण (E-20) का लक्ष्य हासिल कर लिया। गौरतलब है कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए पहले साल 2030 तक की समयसीमा तय की गई थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस त्वरित कदम से देश को करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिली है। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण में कमी और किसानों की आय में बढ़ोतरी जैसे बड़े फायदे भी हुए हैं। लेकिन अब, बाजार और उपभोक्ताओं के जमीनी फीडबैक ने सरकार को अपनी 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' (सबके लिए एक नियम) नीति की समीक्षा करने और उपभोक्ताओं को 'चुनने की आजादी' देने की ओर मोड़ दिया है।