बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ही होंगे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, ममता बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से झटका
जस्टिस कृष्णा राव ने ममता बनर्जी गुट की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोई भी अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई से पहले ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 12:15:32 PM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 12:15:32 PM (IST)
ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी।HighLights
- ममता बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से झटका
- बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ही रहेंगे नेता प्रतिपक्ष
- हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया मना
डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के स्पीकर के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत के इस रुख के बाद फिलहाल विधानसभा स्पीकर का निर्णय प्रभावी रहेगा।
हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया मना
न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने ममता बनर्जी गुट की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोई भी अंतरिम राहत देने से मना कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। प्रतिवादियों को जवाब के लिए तीन हफ्ते और याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई अब 28 जुलाई को होगी।
क्या है पूरा सियासी विवाद?
यह विवाद टीएमसी के भीतर चल रहे गहरे राजनीतिक संकट का नतीजा है। पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत करते हुए दावा किया था कि उनके पास टीएमसी के 58 बागी विधायकों का समर्थन है। ऋतब्रत के गुट का कहना है कि वे ममता बनर्जी को तो नेता मानते हैं, लेकिन उनके भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के अधिकारों को पूरी तरह खारिज करते हैं।
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स्पीकर ने बागी गुट के दावे को कर लिया था स्वीकार
इस खींचतान के बीच विधानसभा स्पीकर रथेंद्र बोस ने बागी गुट के दावे को स्वीकार कर लिया और ममता गुट के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। ममता खेमे ने इस फैसले को नियमों और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, कोर्ट से रोक न मिलने के कारण अंतिम फैसला आने तक ऋतब्रत ही इस पद पर बने रहेंगे।