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BPSC में भाई-बहन का कमाल... 11 साल की नौकरी और 2 बच्चों की जिम्मेदारी के बीच रुचि रानी बनीं SDM, भाई भी पास

स बार ऐसी ही एक बेमिसाल कहानी पटना जिले के बख्तियारपुर से सामने आई है, जहां एक साधारण किसान परिवार के भाई-बहन ने एक साथ बीपीएससी परीक्षा क्रैक कर इतिह...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 07 Jul 2026 04:40:24 PM (IST)Updated Date: Tue, 07 Jul 2026 04:40:24 PM (IST)
BPSC में भाई-बहन का कमाल... 11 साल की नौकरी और 2 बच्चों की जिम्मेदारी के बीच रुचि रानी बनीं SDM, भाई भी पास
BPSC में भाई-बहन का कमाल

एजेंसी, पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) का परिणाम जब भी आता है, अपने साथ कई अविश्वसनीय और प्रेरणादायी कहानियां लेकर आता है। इस बार ऐसी ही एक बेमिसाल कहानी पटना जिले के बख्तियारपुर से सामने आई है, जहां एक साधारण किसान परिवार के भाई-बहन ने एक साथ बीपीएससी परीक्षा क्रैक कर इतिहास रच दिया है।

बख्तियारपुर के रहने वाले किसान अशोक कुमार और सरस्वती शिशु मंदिर की आचार्य नीतू कुमारी के घर आज जश्न का माहौल है, क्योंकि उनके बेटे और बेटी दोनों ने एक साथ प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई है।

11 साल की नौकरी, दो बच्चे और फिर भी पूरा किया SDM बनने का ख्वाब

इस दोहरी सफलता में सबसे खास और अनुकरणीय कहानी बेटी रुचि रानी की है। रुचि ने परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल कर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) का पद अपने नाम किया है। रुचि की यह कामयाबी इसलिए मिसाल है क्योंकि वे दो बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) की मां हैं। उनकी शादी नालंदा जिले के सरमेरा में हुई है, जहां उनके पति एक निजी फार्मा कंपनी में मैनेजर हैं।


रुचि पिछले 11 वर्षों से लगातार नौकरी कर रही हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जीविका से की थी और वर्तमान में पंचायती राज विभाग में कार्यरत हैं। एक फुल-टाइम सरकारी नौकरी, पति और दो बच्चों के परिवार की बड़ी जिम्मेदारी के बीच रुचि ने कभी अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। उन्होंने बताया कि इस कठिन सफर में उनका सबसे बड़ा हथियार 'टाइम मैनेजमेंट' (समय का सही प्रबंधन) और परिवार का अटूट सहयोग रहा।

दो बार की असफलता के बाद तीसरे प्रयास में मारी बाजी

यह राह रुचि के लिए इतनी आसान भी नहीं थी। वे पिछले पांच साल से इस परीक्षा की तैयारी में जुटी थीं। शुरुआती दो प्रयासों में उन्होंने प्रीलिम्स तो पास कर लिया, लेकिन मेंस (मुख्य परीक्षा) की बाधा पार नहीं कर पाईं। लगातार दो असफलताओं के बाद भी रुचि टूटी नहीं, बल्कि उन्होंने अपनी गलतियों को सुधारा और तीसरे प्रयास में सीधे एसडीएम का पद हासिल कर लिया।

भाई ने भी बढ़ाई परिवार की शान

इस खुशियों भरे माहौल को रुचि के भाई आलोक अभिजीत ने दोगुना कर दिया। आलोक वर्तमान में बैंक ऑफ इंडिया में एक अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने भी अपनी नौकरी के साथ तैयारी जारी रखी और परीक्षा में 1182वीं रैंक प्राप्त कर सफलता का परचम लहराया। यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी जिम्मेदारी आपकी राह का रोड़ा नहीं बन सकती।

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