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सोनम वांगचुक सफदरजंग से मेदांता अस्पताल होंगे शिफ्ट, डॉक्टरों का विशेष पैनल करेगा इलाज, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल से गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 21 Jul 2026 03:09:38 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Jul 2026 03:09:38 PM (IST)
सोनम वांगचुक सफदरजंग से मेदांता अस्पताल होंगे शिफ्ट, डॉक्टरों का विशेष पैनल करेगा इलाज, हाईकोर्ट ने दिया आदेश
सोनम वांगचुक मेदांता अस्पताल में होंगे शिफ्ट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सोनम वांगचुक मेदांता अस्पताल में होंगे शिफ्ट
  2. मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद दिया अहम आदेश
  3. पूरा मेडिकल रिकॉर्ड मेदांता को सौंपने का निर्देश

डिजिटल डेस्क। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत से जुड़ी याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल से गुड़गांव स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।

अदालत में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने उन्हें मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का सुझाव दिया, जिस पर केंद्र सरकार और सॉलिसिटर जनरल (एसजी) की ओर से कहा गया कि अगर वांगचुक को मेदांता में भर्ती कराया जाता है तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, सरकार ने यह शर्त जरूर रखी कि उन्हें चिकित्सकों की परामर्श के बिना अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जाएगी।


सफदरजंग से मेदांता को सौंपी जाएगी मेडिकल फाइल

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सफदरजंग अस्पताल में अब तक सोनम वांगचुक के चले इलाज का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड तत्काल प्रभाव से मेदांता अस्पताल के प्रबंधन को सौंपा जाएगा। इसके साथ ही मेदांता के निदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि वे वांगचुक की स्थिति की जांच और देखभाल के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक विशेष पैनल गठित करें।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने डॉक्टरों से पूछे तीखे सवाल

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सोनम वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट का संज्ञान लिया। वांगचुक के वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने डॉक्टरों से पूछा कि यूरिया और यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर क्या संकेत देता है? क्या यह शरीर में किसी गंभीर समस्या की तरफ इशारा नहीं करता?

इस सवाल का जवाब देते हुए उपस्थित डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति ग्लूकोज का सेवन बंद कर देता है, तो शरीर अपनी ऊर्जा वसा (फैट) से प्राप्त करता है। फैट बर्न होने की प्रक्रिया से मूत्र में कीटोन बनने लगते हैं। कई दिनों तक लगातार अनशन या भूखे रहने की स्थिति में शरीर में ऐसे जैविक बदलाव आना स्वाभाविक है।

एम्स के निदेशक ने मेडिकल रिपोर्ट पर क्या कहा?

अदालत में एम्स के निदेशक और डॉक्टरों की टीम भी मौजूद रही। एम्स के निदेशक ने वांगचुक की रिपोर्ट का विश्लेषण करते हुए बताया कि मरीज के शरीर में पोटैशियम का स्तर कम है, जिसे नियंत्रित करने के लिए आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं।

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डॉक्टरों ने अदालत को बताया:

  • कमजोरी और इम्यूनिटी: वांगचुक की रिपोर्ट के अनुसार उनके सफेद रक्त कणिकाओं (WBC) का स्तर गिर गया है, जो सामान्य नहीं है। प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर डब्ल्यूबीसी घटने लगते हैं।
  • संक्रमण का खतरा: हीमोग्लोबिन, डब्ल्यूबीसी और प्लेटलेट्स की संख्या सामान्य सीमा से बाहर है। इस स्थिति में मरीज की संक्रमण से लड़ने की क्षमता बेहद कम हो जाती है।
  • सख्त प्रोटोकॉल जरूरी: संक्रमण के खतरे को देखते हुए अस्पताल में उनसे मिलने आने वाले लोगों के लिए सुरक्षा गाउन, कैप और मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है।

वकील ने दिया वाइटल्स स्थिर होने का तर्क

वांगचुक के वकील अखिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि अनशन के बावजूद वर्तमान में उनके वाइटल्स स्थिर हैं। हालांकि कुछ मेडिकल पैरामीटर्स में उतार-चढ़ाव जरूर दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की देखरेख और निगरानी में इलाज जारी रखने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

सभी पक्षों के तर्कों को सुनने के उपरांत अदालत ने सोनम वांगचुक को बेहतर इलाज के लिए मेदांता अस्पताल स्थानांतरित करने का फैसला सुनाया।