'दहेज देने के आधार पर पत्नी के परिवार पर FIR नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि कोई पत्नी अपनी शिकायत में यह स्वीकार करती है कि उसने या उसके परिवार ने दहेज दिया था, तो मात्र इस बयान के आधार प ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 18 Apr 2026 01:03:59 PM (IST)Updated Date: Sat, 18 Apr 2026 01:06:06 PM (IST)
दहेज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है (फाइल फोटो)HighLights
- दहेज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है
- दहेज देने के आधार पर पत्नी के परिवार पर FIR नहीं- सुप्रीम कोर्ट
- दहेज देने वाला अपराधी नहीं, मजबूर पीड़ित है- सुप्रीम कोर्ट
डिजिटल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दहेज से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि कोई पत्नी अपनी शिकायत में यह स्वीकार करती है कि उसने या उसके परिवार ने दहेज दिया था, तो मात्र इस बयान के आधार पर उन पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने एक पति द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने मांग की थी कि उसकी पत्नी के परिवार के खिलाफ दहेज देने के जुर्म में दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 के तहत FIR दर्ज की जाए। पति का तर्क था कि जब पत्नी खुद दहेज देने की बात मान रही है, तो वह भी कानूनन अपराधी है।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 7(3) पीड़ित (शिकायतकर्ता) को अभियोजन से सुरक्षा प्रदान करती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ित बिना किसी कानूनी डर के अपनी बात रख सके और शिकायत दर्ज करा सके। कोर्ट ने कहा कि केवल शिकायत या बयान के आधार पर कार्रवाई नहीं होगी।
यदि स्वतंत्र और ठोस सबूत मौजूद हों, तभी धारा 3 के तहत दहेज देने वाले पर केस संभव है। यहां कोर्ट ने 1982 की संयुक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दहेज देने वाले अक्सर अपराधी नहीं बल्कि सामाजिक परिस्थितियों और दबाव के पीड़ित होते हैं।