

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ता तापमान दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के जुलाई 2026 के आकलन के मुताबिक, प्रशांत महासागर में अल नीनो मजबूत हो रहा है। इसके 2026 के अंत तक और तीव्र होने का अनुमान है। अक्टूबर दिसंबर 2026 के दौरान इसके बहुत मजबूत अल नीनो बनने की 81% संभावना जताई गई है। NOAA के मुताबिक, यह घटना 1950 के बाद के सबसे बड़े अल नीनो घटनाक्रमों में शामिल हो सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया में हर जगह एक जैसा मौसम देखने को मिलेगा। अल नीनो का असर क्षेत्र के हिसाब से अलग अलग होता है। इसकी तीव्रता बढ़ने पर कुछ संभावित प्रभावों की संभावना जरूर बढ़ती है।
भारत के लिए अल नीनो इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव का असर वैश्विक वायुमंडलीय परिसंचरण पर पड़ता है। इसका प्रभाव भारतीय मानसून पर भी पड़ सकता है। लेकिन मौजूदा समय में इसका सीधा असर भारत के मानसून पर कितना पड़ेगा। इसे लेकर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। NOAA के जुलाई के पूर्वानुमान में अल नीनो को मजबूत होने और 2027 की शुरुआत तक बने रहने की संभावना जताई गई है।
अल नीनो की स्थिति में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। NOAA के जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक, Niño 3.4 क्षेत्र का तापमान सामान्य से करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था, जबकि पूर्वी हिस्से के Niño 1+2 क्षेत्र में यह अंतर 2.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
यही गर्म समुद्री सतह वातावरण में बड़े पैमाने पर बदलाव ला सकती है। दुनिया के अलग अलग हिस्सों के तापमान, बारिश और सूखे के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल इसे निश्चित तौर पर कहना सही नहीं होगा, लेकिन संभावना जरूर मजबूत है। NOAA के मुताबिक, अक्टूबर दिसंबर 2026 में बहुत मजबूत अल नीनो की 81% संभावना है और यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड में दर्ज सबसे बड़े अल नीनो घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है। NOAA से जुड़े Geophysical Fluid Dynamics Laboratory के जुलाई के प्रयोगात्मक मॉडल में भी बहुत मजबूत अल नीनो के शरद ऋतु और शुरुआती सर्दियों तक और मजबूत होने का संकेत मिला है।
अल नीनो मजबूत होने पर इसके प्रभाव अलग अलग क्षेत्रों में अलग हो सकते हैं। कुछ इलाकों में सूखे की स्थिति बनने की संभावना बढ़ सकती है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। सबसे बड़ा असर वैश्विक तापमान पर भी देखने को मिल सकता है। गर्म समुद्री सतह और पहले से जारी ग्लोबल वार्मिंग के बीच मजबूत अल नीनो वैश्विक तापमान को और ऊपर धकेल सकता है।
अल नीनो के दौरान इंडोनेशिया और आसपास के क्षेत्रों में बारिश कम होने की संभावना बढ़ सकती है। इससे सूखे और जंगलों में आग का खतरा भी बढ़ सकता है। NOAA के जुलाई के विश्लेषण में प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती गर्मी के साथ इंडोनेशिया के ऊपर बारिश में कमी और वहां दबे हुए वायुमंडलीय संवहन का संकेत मिला है।
भारत में अल नीनो का असर केवल मानसून के दौरान ही देखने को मिले, यह जरूरी नहीं है। मजबूत अल नीनो के प्रभाव अगले मौसमों तक बने रह सकते हैं। NOAA का मौजूदा अनुमान है कि अल नीनो 2027 की शुरुआत तक जारी रह सकता है। इसलिए मानसून के बाद भारत के तापमान और बारिश के पैटर्न पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल इसे मौसम से जुड़ी गंभीर चेतावनी के तौर पर देखना ज्यादा उचित है, न कि किसी निश्चित आपदा के रूप में। अल नीनो का मजबूत होना संभावित जोखिम बढ़ाता है, लेकिन किसी खास देश में कितनी बारिश होगी, कितना तापमान बढ़ेगा या सूखा कितना गंभीर होगा, यह कई दूसरे मौसमी कारकों पर भी निर्भर करता है। NOAA के अनुसार, मजबूत अल नीनो भी दुनिया के हर हिस्से में एक जैसा असर नहीं डालता। इसलिए आने वाले महीनों के मौसम पूर्वानुमानों और भारतीय मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखना ज्यादा जरूरी होगा।
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