
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक पेचीदा कानूनी सवाल खड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत इस बात की समीक्षा कर रही है कि क्या गिरफ्तारी मेमो (Arrest Memo) में टाइपिंग की महज एक तकनीकी त्रुटि किसी गंभीर मामले के आरोपी को जमानत दिलाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकती है? अदालत इस महत्वपूर्ण विषय को अंतिम फैसले के लिए एक बड़ी पीठ को सौंपने पर विचार कर रही है।
यह पूरा मामला राजा रघुवंशी हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी मुख्य आरोपी है। मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर सोनम को मिली जमानत को रद करने की गुहार लगाई है।
राज्य सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के आधिकारिक दस्तावेजों में एक लिपिकीय चूक (Typographical Error) हो गई थी। इसके तहत नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या से संबंधित धारा 103 दर्ज करने के स्थान पर गलती से धारा 403 (संपत्ति का गबन) अंकित हो गई। इसी तकनीकी खामी का लाभ उठाकर आरोपी को हाई कोर्ट से राहत मिल गई।
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने कहा कि यह विषय काफी गंभीर है और इस पर विस्तृत कानूनी मंथन की आवश्यकता है। अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या ऐसे मामलों को बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई आगामी मंगलवार तक के लिए टाल दी है। साथ ही, मेघालय सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह अगली तारीख पर सोनम रघुवंशी को दिए गए गिरफ्तारी के वे मूल दस्तावेज पेश करे, जिनमें उनकी हिरासत का वास्तविक आधार दर्ज था।