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मैथ्स में सिर्फ 51 नंबर, IIT से पढ़ाई, ISRO की जॉब छोड़ी,... आज पवन चंदना ने भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' लॉन्च कर रचा इतिहास

Success Story: भारत की पहली निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा से भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च कर इत...और पढ़ें

By Akash SharmaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 18 Jul 2026 01:42:30 PM (IST)Updated Date: Sat, 18 Jul 2026 01:42:30 PM (IST)
मैथ्स में सिर्फ 51 नंबर, IIT से पढ़ाई, ISRO की जॉब छोड़ी,... आज पवन चंदना ने भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' लॉन्च कर रचा इतिहास
ISRO वैज्ञानिक से स्पेस उद्यमी बने पवन चंदना की कहानी (फोटो क्रेडिट- सोशल मीडिया)

HighLights

  1. विक्रम-1 ने रचा भारत का नया स्पेस इतिहास
  2. मिशन आगमन 35 मिनट देरी से लॉन्च
  3. स्काईरूट भारत की पहली निजी स्पेस यूनिकॉर्न

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) ने शनिवार, 18 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से देश का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 सफलतापूर्वक लॉन्च किया।

यह लॉन्च दोपहर 12:05 बजे हुआ। शुरुआत में रॉकेट को सुबह 11:30 बजे उड़ान भरनी थी, लेकिन अंतिम समय में काउंटडाउन रोक दिया गया। बाद में तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद काउंटडाउन दोबारा शुरू हुआ और रॉकेट निर्धारित संशोधित समय पर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ।


मिशन 'आगमन' के तहत हुई ऐतिहासिक लॉन्चिंग

स्काईरूट एयरोस्पेस ने इस मिशन को "मिशन आगमन" नाम दिया था। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और नेविगेशन से जुड़ी दिक्कतों के कारण लॉन्च में लगभग 35 मिनट की देरी हुई। इसके बावजूद मिशन सफल रहा और भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि साबित हुआ। यह लॉन्च देश में निजी कंपनियों की अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

#WATCH | Andhra Pradesh: India's first privately developed orbital-class rocket, Vikram-1, launched from the Satish Dhawan Space Centre in Sriharikota

Built by Hyderabad-based Skyroot Aerospace, Vikram-1 is powered by three solid-fuel stages and a liquid orbital adjustment… pic.twitter.com/QQC9CPjcxH

— ANI (@ANI) July 18, 2026

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की नई छलांग

विक्रम-1 करीब 16 मिनट तक अंतरिक्ष मिशन पर रहेगा। रॉकेट की ऊंचाई 22 मीटर और व्यास 1.7 मीटर है। यह ऑर्बिटल फ्लाइट की कोशिश करने वाले भारतीय रॉकेटों में सबसे छोटा रॉकेट माना जा रहा है।

भले ही दुनिया में स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी निजी कंपनियां पहले से सक्रिय हैं, लेकिन भारत के लिए यह लॉन्च निजी अंतरिक्ष उद्योग के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। रक्षा क्षेत्र के बाद अब अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है।

छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए तैयार किया गया विक्रम-1

विक्रम-1 को विशेष रूप से छोटे सैटेलाइट को पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह कार्बन बॉडी और 3D प्रिंटेड इंजनों के साथ भारत में ही विकसित किया गया है। यह मिशन भारतीय निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए भविष्य के व्यावसायिक लॉन्च का रास्ता भी खोल सकता है।

मैथ्स में 51 नंबर से IIT तक का सफर

स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और सीईओ पवन कुमार चंदना (CEO Pawan Kumar Chandana) का सफर भी काफी प्रेरणादायक रहा है।हैदराबाद के एक मध्यमवर्गीय परिवार में 1991 में जन्मे पवन चंदना ने एक इंटरव्यू में बताया था कि स्कूल के दिनों में वह सामान्य छात्र थे और गणित में उनके केवल 51 अंक आए थे। हालांकि मशीनों और नई तकनीक के प्रति उनकी रुचि ने उनकी दिशा बदल दी।

उन्होंने 2007 में IIT प्रवेश परीक्षा पास की और IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक तथा 2012 में थर्मल इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल की।

ISRO में वैज्ञानिक रहे पवन चंदना

पढ़ाई पूरी करने के बाद 2012 में पवन कुमार चंदना ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम में वैज्ञानिक के रूप में काम शुरू किया।

उन्होंने GSLV Mk-III जैसे भारी रॉकेट कार्यक्रम में योगदान दिया, जिसका उपयोग चंद्रयान मिशन में भी किया गया। इसके अलावा वह GSLV Mk-II के S200 सॉलिड बूस्टर के सिस्टम इंजीनियर रहे। उन्होंने ISRO के स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मिशन में डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए 2016 में ISRO ने उन्हें दो इनोवेशन अवॉर्ड्स से सम्मानित किया।

दोस्त के साथ छोड़ दी सरकारी नौकरी

ISRO में काम करने के दौरान पवन चंदना और उनके मित्र नागा भरत डाका ने महसूस किया कि दुनिया भर में छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने यह भी समझा कि भविष्य में ऑन-डिमांड स्पेस लॉन्च सेवाओं की जरूरत बढ़ेगी। इसी सोच के साथ दोनों ने सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला किया और जून 2018 में हैदराबाद में स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना की। कंपनी का उद्देश्य अंतरिक्ष तक पहुंच को उतना ही आसान बनाना है, जितना किसी मोबाइल ऐप से कैब बुक करना।

विक्रम-S से मिली पहली बड़ी सफलता

स्काईरूट एयरोस्पेस ने 18 नवंबर 2022 को भारत का पहला निजी सब-ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-S सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। इसके साथ ही स्काईरूट अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बनी। अब विक्रम-1 कंपनी का पहला ऑर्बिटल क्लास रॉकेट है, जिससे निजी अंतरिक्ष मिशनों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न बनी स्काईरूट

स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने नवाचार और तकनीकी क्षमता के दम पर वैश्विक निवेशकों का भी ध्यान आकर्षित किया। ब्लैकरॉक, टेमासेक और GIC जैसी प्रमुख कंपनियों ने इसमें निवेश किया। इन निवेशों के बाद स्काईरूट 1 अरब डॉलर से अधिक वैल्यूएशन हासिल करने वाली भारत की पहली स्पेसटेक यूनिकॉर्न कंपनी बन गई।

फोर्ब्स में मिली जगह, कई सम्मान भी हासिल किए

पवन कुमार चंदना को Forbes 30 Under 30 Asia 2020 सूची में स्थान मिला। उनकी कंपनी को भारत सरकार की ओर से नेशनल स्टार्टअप अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें 2018 में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग डिवीजन पुरस्कार भी मिला। पवन कुमार चंदना ने अक्टूबर 2019 में निरुपमा तुंगला से विवाह किया।