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Voter ID बनवाने का नियम बदला, अब Form-6 में यह जानकारी दिए बिना आगे नहीं बढ़ेगा आवेदन

पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले आवेदकों के लिए चुनाव आयोग ने ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया में नया प्रावधान लागू किया है।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 10:17:57 AM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 10:19:13 AM (IST)
Voter ID बनवाने का नियम बदला, अब Form-6 में यह जानकारी दिए बिना आगे नहीं बढ़ेगा आवेदन
नए मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग का नया नियम (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. बिना घोषणा-पत्र आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा
  2. पहचान सत्यापन आसान बनाने का दावा
  3. नए नियम पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए

डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने वाले नागरिकों के लिए चुनाव आयोग ने ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया में नया प्रावधान लागू किया है। अब फॉर्म नंबर 6 (Form-6) भरने वाले आवेदकों को अपने माता-पिता की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित जानकारी भी देनी होगी। यदि ऑनलाइन आवेदन के दौरान यह घोषणा-पत्र नहीं भरा जाता है, तो आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी।

माता-पिता की SIR स्थिति बताना होगा जरूरी

चुनाव आयोग के अनुसार, यदि आवेदक के माता-पिता पिछली विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में शामिल रहे हैं, तो उनके विधानसभा क्षेत्र, पोलिंग बूथ (पार्ट नंबर) और मतदाता सूची में दर्ज क्रमांक की जानकारी देनी होगी।

यदि माता-पिता SIR प्रक्रिया में शामिल नहीं थे, तो आवेदक को संबंधित विकल्प चुनना होगा। इसके साथ ही उनके नाम और यदि उपलब्ध हों तो EPIC (Elector Photo Identity Card) नंबर भी दर्ज करने होंगे।

आयोग ने बताया बदलाव का उद्देश्य

चुनाव आयोग का कहना है कि इस व्यवस्था से नए मतदाताओं की पहचान का सत्यापन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। आयोग के मुताबिक, कई मामलों में इससे अतिरिक्त दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता भी कम हो सकती है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि Form-6 के निर्धारित प्रारूप में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया है, बल्कि निर्देश जारी कर इस घोषणा को अनिवार्य बनाया गया है।


नए नियम पर उठे कानूनी सवाल

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विशेषज्ञों ने इस नए प्रावधान पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि Form-6 जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और मतदाता पंजीकरण नियमों के तहत निर्धारित प्रारूप का हिस्सा है। ऐसे में इसके स्वरूप में किसी भी बदलाव के लिए केंद्र सरकार की अधिसूचना और राजपत्र (गजट) में संशोधन आवश्यक होता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अब तक इस संबंध में कोई संशोधित अधिसूचना सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई है। चुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को संवैधानिक, पारदर्शी और पहचान सत्यापन के लिए आवश्यक बताया है।