UPI पेमेंट्स को लेकर बड़ा अपडेट: नया कानून लागू, क्या अब आपको देना होगा ट्रांजैक्शन चार्ज?
'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन गया है। इससे आम जनता और छोटे व्यापारियों के मन में सवाल उठने लगा है ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 20 Aug 2026 07:24:47 PM (IST)Updated Date: Thu, 20 Aug 2026 07:25:53 PM (IST)
HighLights
- राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना यह बिल
- UPI अब 11 देशों में काम कर रहा है
- अब तक UPI और रुपे डेबिट कार्ड शुल्क से मुक्त थे
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद द्वारा 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' को पारित किए जाने के बाद अब यह राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ कानून बन गया है। इस नए कानून ने 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की धारा 10A में अहम संशोधन किया है।
इसके तहत UPI और रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड पर मिलने वाला 'स्वतः शुल्क-मुक्त संरक्षण' खत्म हो गया है। यानी, अब कौन सा पेमेंट मेथड फ्री रहेगा, इसका फैसला सरकार के हाथ में होगा। इससे आम जनता और छोटे व्यापारियों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या अब उन्हें हर यूपीआई लेनदेन पर शुल्क देना होगा?
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बना यह बिल
गत 6 अगस्त को लोकसभा ने कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित हुआ था। 10 अगस्त को राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। राष्ट्रपति की राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब यह बिल कानून बन गया है।
सरकार का क्या है कहना?
केंद्र सरकार का कहना है कि ग्राहकों के लिए UPI मुफ्त रहेगा और सभी पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन भी मुफ्त बने रहेंगे। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि UPI से पेमेंट करने पर ग्राहकों को कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा और ज्यातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहेंगे।
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू किए जाते हैं, तो वे एक निश्चित सीमा से ज्यादा वाले कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर बहुत कम दर पर लागू होंगे। पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में संशोधन का मकसद UPI की लंबे समय तक चलने की क्षमता, तकनीकी तरक्की और नए खतरों से निपटने की मजबूती को पक्का करना है।
UPI अब 11 देशों में काम कर रहा है
मंत्रालय ने कहा कि जैसे-जैसे ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ेगी, साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी रोकने, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश जरूरी होगा। इस प्लेटफॉर्म ने अकेले पिछले महीने 29.9 लाख करोड़ रुपये के 2,366 करोड़ ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए और अब यह 11 देशों में भी काम कर रहा है।
अब तक UPI और रुपे डेबिट कार्ड शुल्क से मुक्त थे
अब तक UPI और रुपे डेबिट कार्ड शुल्क से पूरी तरह मुक्त थे। इस बिल के बाद इस पर स्वतः संरक्षण खत्म हो गया है। अब कोई पेमेंट का तरीका फ्री रहेगा या नहीं, यह सरकार पर निर्भर करेगा। यूपीआई दुनिया का सबसे बड़ा रीयल-टाइम पेमेंट नेटवर्क है। इसे चलाने की सालाना लागत करीब ₹20000 करोड़ बताई जाती है।
कम मूल्य के भुगतान मुफ्त रहेंगे, मिला आश्वासन
यूपीआई के ज्यादातर लेनदेन छोटे हैं 30-40 रुपये के। 2000 रुपये से ऊपर के सिर्फ 4% लेनदेन वैल्यू का दो-तिहाई हिस्सा हैं। अगर छोटे लेनदेन पर भी शुल्क लगा तो रिक्शा चालक और ठेले वाले नकदी की ओर लौट सकते हैं। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था का मकसद ही कमजोर होगा।
हालांकि वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया है कि कम मूल्य के भुगतान मुफ्त रहेंगे और कोई एमडीआर फिलहाल तय नहीं है। लेकिन विधेयक में यह वादा लिखित नहीं है। फैसला अब कार्यकारी अधिसूचना पर टिका है।