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ग्वालियर के प्रसिद्ध अचलेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब; जानिए क्या है 'अचल' शिवलिंग का अनोखा इतिहास

सावन के पहले दिन ग्वालियर के अचलेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा। हाथियों के जोर लगाने पर भी अपनी जगह से न हिलने के चमत्कार के कारण इस शिव...और पढ़ें

By Mahesh GuptaEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Thu, 30 Jul 2026 03:55:00 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Jul 2026 03:57:17 PM (IST)
ग्वालियर के प्रसिद्ध अचलेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब; जानिए क्या है 'अचल' शिवलिंग का अनोखा इतिहास
सावन 2026 के पहले दिन ग्वालियर के प्रसिद्ध अचलेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सावन के पहले दिन अचलेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा
  2. यहां के शिवलिंग को हाथी भी न हिला सके। इसी कारण इसका नाम अचलेश्वर पड़ा
  3. बाबा अचलेश्वर के दर्शन और सेवा करने से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर. पवित्र सावन महीने की शुरुआत आज से हो चुकी है। हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व है। यह पूरा महीना देवों के देव महादेव की आराधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। सावन के पहले दिन ग्वालियर स्थित अति-प्राचीन और चमत्कारिक अचलेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी हुई है।

अपनी अनूठी धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का केंद्र है।

महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास

अचलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। जनश्रुतियों और मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थान का संबंध महाभारत काल से है। हालांकि, मंदिर के वर्तमान स्वरूप का निर्माण समय-समय पर कई चरणों में हुआ, लेकिन इसकी प्राचीनता आज भी भक्तों को अपनी ओर खींच लाती है।


इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थापित शिवलिंग है। कहा जाता है कि सदियों पहले एक राजा ने इस स्थान से शिवलिंग को हटाने की हरसंभव कोशिश की थी। इसके लिए कई हाथियों का बल भी लगाया गया, लेकिन विशालकाय हाथियों की ताकत के बावजूद शिवलिंग अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ। शिवलिंग के इस 'अचल' (स्थिर) रहने के चमत्कार के कारण ही इस मंदिर का नाम 'अचलेश्वर महादेव' पड़ा।

सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भारी भीड़

मंदिर की वास्तुकला और आध्यात्मिकता हर किसी का मन मोह लेती है। वैसे तो यहां सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन के महीने और महाशिवरात्रि के पर्व पर यहां का नजारा देखते ही बनता है। रोजाना हजारों की संख्या में भक्त बाबा अचलेश्वर के दर्शन और जलाभिषेक करने पहुँचते हैं।

भक्तों की जुबानी, बाबा अचलेश्वर की कहानी

महेंद्र भदकारिया (श्रद्धालु) ने कहा- अचलेश्वर महादेव मंदिर में एक अद्भुत और चमत्कारिक शक्ति है। मैं पिछले 45 सालों से यहां निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहा हूं, जिससे मुझे असीम आत्मिक शांति मिलती है। मेरी जिंदगी में जब भी कोई काम बिगड़ता है, तो बाबा अचलेश्वर ही उसे बनाते हैं।

वहीं, एक और श्रद्धालु राजेंद्र कुमार सिंघल ने कहा- मैं और मेरी पत्नी सुमन सिंघल पिछले 35 साल से लगातार यहां दर्शन के लिए आ रहे हैं। हम रोज सुबह 3 बजे बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। आज मैं और मेरा परिवार जिस भी मुकाम पर हैं, वह सब केवल और केवल बाबा की असीम कृपा का ही फल है।

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