
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। पंचांगीय गणना के अनुसार देवगुरु बृहस्पति 2 जून को दोपहर में 1 बजकर 52 मिनट पर मिथुन को छोड़कर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु का कर्क राशि में परिभ्रमण 30 अक्टूबर तक रहेगा। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार कर्क राशि में बृहस्पति उच्च अंश में रहते हैं। ऐसे में आने वाले पांच माह वे अधिक शुभ फल प्रदान करेंगे। बारह राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्योदय कारक रहेगा। धन लाभ होगा तथा रुके हुए काम बनेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया देवगुरु बृहस्पति जिन्हें आम बोलचाल की भाषा में गुरु महाराज कहा जाता है, प्राय: शुभफल प्रदान करने वाले माने गए हैं। कर्क राशि में इनका गोचर और भी अधिक शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। अर्थात इस राशि में वें कल्याण करने वाले बताए गए हैं।
धर्मशास्त्र की इसी मान्यता के चलते 2 जून से आने वाले पांच माह संपूर्ण विश्व के लिए अनुकूलता का संकेत दे रहे हैं। विभिन्न राशियों के लिए भी यह समय लाभदायक सिद्ध होगा। धर्म, अध्यात्म, संस्कृति तथा शिक्षा से जुड़े क्षेत्रों में संशोधन एवं परिवर्तन होगा, जो आने वाले समय के लिए बेहतर रहेगा।
8 जून को गुरु की शुक्र से साथ बनेगी युति पंचांग की गणना के अनुसार 8 जून को दोपहर 3 बजकर 55 मिनट पर दैत्य गुरु शुक्र भी कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र के कर्क राशि में आते ही गुरु के साथ युतिकृत होंगे। कर्क राशि के अधिपति चंद्रमा है, ऐसे में गुरु शुक्र की युति आने वाली वर्षा ऋतु व श्रेष्ठ धान्य उत्पादन के लिए अच्छा संकेत दे रही है। हालांकि गुरु व शुक्र एक दूसरे के नैसर्गिक शत्रु हैं, लेकिन ग्रह गोचर में केंद्र त्रिकोण में परिस्थितयों में बदलाव हो जाता है, यह स्थिति कृषि के लिए अनुकूल है।
पं. डब्बावाला ने बताया कर्क राशि में गुरु व शुक्र की युति से मानूसन पूर्व की गतिविधियां बढ़ेगी और यह वर्षा ऋतु के चक्र को एकाएक परिवर्तित करेगा। हालांकि पंचांग की गणना के अनुसार वर्षा की स्थिति उत्तम रहने वाली है। अर्थात देश में सामान्य वर्षा के साथ साथ अतिवर्षा के योग भी बनेंगे। हमेशा की तरह कुछ स्थानों पर खंड व अल्प वृष्टि के योग भी बनेंगे, फिर भी वर्षा ऋतु का सर्वत्र प्रभाव निर्मित होगा।
गुरु के राशि परिवर्तन का असर कीमती धातुओं के बाजार पर पड़ेगा। आने वाले पांच माह सोने, चांदी के बाजार में उठा पटक देखने को मिलेगी। शेयर मार्केट पर भी इसका असर नजर आएगा। विश्व बाजार में रुपये की स्थिति और मौद्रिक नीति पर भी चर्चा की आवश्यकता महसूस होगी।