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12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी है महाकालेश्वर, यमराज से संबंध…जानें महाकाल मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातें

उज्जैन स्थित देश के एकमात्र दक्षिणमुखी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कुछ अनोखे तथ्य है जिसके बारे में कई लोग नहीं जानते। साथ ही मंदिर और भस्म आरती को लो...और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 11:04:22 AM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 11:04:22 AM (IST)
12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी है महाकालेश्वर, यमराज से संबंध…जानें महाकाल मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातें
उज्जैन के दक्षिणमुखी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में रोज तड़के ब्रह्म मुहूर्त की जाती है। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी है
  2. यह तीन मंजिला मंदिर है, जिसमें महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और नागचंद्रेश्वर हैं
  3. नागचंद्रेश्वर मंदिर को सिर्फ नागपंचमी के दिन ही खोला जाता है

धर्म डेस्क, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हालांकि महाकाल मंदिर से जुड़े कई ऐसे तथ्य हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आइए जानते हैं महाकालेश्वर मंदिर की कुछ खास बातें।

1. दक्षिणमुखी है महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा का संबंध यमराज से जोड़ा जाता है। इस वजह से महाकाल को काल का भी काल कहा गया है।

2. तीन मंजिला मंदिर की अलग पहचान

महाकाल मंदिर तीन मंजिलों वाला है। निचले तल पर महाकालेश्वर, दूसरे तल पर ओंकारेश्वर और सबसे ऊपर नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है। नागचंद्रेश्वर के कपाट साल में केवल नाग पंचमी के दिन ही खुलते हैं।

3. भस्म आरती सबसे अनोखी परंपरा

महाकाल मंदिर की सुबह होने वाली भस्म आरती पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह आरती ब्रह्म मुहूर्त में होती है। इसे देखने के लिए पहले से अनुमति लेनी होती है।

4. उज्जैन का प्राचीन इतिहास

महाकाल मंदिर का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। माना जाता है कि यह स्थान हजारों वर्षों से भगवान शिव की आराधना का प्रमुख केंद्र रहा है।

5. राजा चंद्रसेन की कथा

धार्मिक मान्यता के अनुसार उज्जैन के राजा चंद्रसेन की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं महाकाल रूप में यहां प्रकट हुए थे और भक्तों की रक्षा की थी।

6. सावन में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की संख्या

श्रावण मास और महाशिवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालु महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं। इस दौरान विशेष पूजा और व्यवस्थाएं की जाती हैं।

7. कालों के काल हैं महाकाल

‘महाकाल’ का अर्थ है समय और मृत्यु पर भी विजय पाने वाले भगवान शिव। इसी कारण उन्हें कालों का काल कहा जाता है।

8. श्मशान से जुड़ा स्वरूप

भगवान शिव के महाकाल स्वरूप का संबंध वैराग्य और श्मशान से भी माना जाता है। इसलिए उन्हें मृत्यु के भय को दूर करने वाला देवता माना जाता है।

9. सिंहस्थ कुंभ से खास जुड़ाव

हर 12 वर्ष में उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ कुंभ महाकाल मंदिर की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है। इस दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

10. देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु

महाकालेश्वर मंदिर केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी आस्था का प्रमुख केंद्र है

भस्म आरती: मिथक और तथ्य

मिथक: भस्म आरती आज भी चिता की ताजा राख से होती है।

तथ्य: वर्तमान में भस्म आरती में श्मशान की ताजा चिता की राख का उपयोग नहीं किया जाता। लंबे समय से मंदिर प्रशासन द्वारा धार्मिक परंपराओं के अनुरूप तैयार की गई पवित्र भस्म का उपयोग किया जाता है।

मिथक: कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति भस्म आरती देख सकता है।

तथ्य: भस्म आरती में शामिल होने के लिए पहले से पंजीकरण या अनुमति जरूरी होती है। नियम समय-समय पर बदल सकते हैं।

मिथक: केवल पुरुष ही आरती देख सकते हैं।

तथ्य: महिलाएं भी भस्म आरती के दर्शन कर सकती हैं। हालांकि गर्भगृह में प्रवेश और ड्रेस कोड से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है।

मिथक: भस्म आरती सिर्फ सावन में होती है।

तथ्य: भस्म आरती प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होती है। सावन और महाशिवरात्रि में इसकी विशेष महत्ता होती है और श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहती है।

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