धर्म डेस्क। पितृपक्ष और पितृ मोक्ष अमावस्या को लेकर सनातनियों की नई पीढ़ी के मन में, ब्राह्मण भोजन, तर्पण, सफ़ेद फूल ही क्यों जैसी कई जिज्ञासाएं जन्म लेती हैं। जिनका सही उत्तर कुछ अभिभावक दे पाते हैं कुछ नहीं। नई पीढ़ी की जिज्ञासा को लेकर आचार्य पंडित मनीष शुक्ल जी से वार्ता की, उन्होंने संक्षिप्त व सार गर्भित उत्तर दिए।
पितृपक्ष के 15 दिन पितरों के होते हैं। इसका अंतिम दिन अमावस्या होता है। इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहते हैं। इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध होता है जिनकी मृत्युतिथि अज्ञात है या किसी कारण से पहले श्राद्ध नहीं कर पाये हैं। अगर आप 15 दिनों तक तर्पण नहीं कर सके हों, तो अमावस्या के दिन तर्पण कर लेने से पूरे पितृपक्ष का फल प्राप्त होता है। इस दिन पितृ धरती से विदा लेकर अपने पितृलोक को लौट जाते हैं। इस दिन किया गया श्राद्ध, दान पितरों तक सीधा पहुंचता है।
दोपहर में ही क्यों किया जाता है पितरों का भोजन, दक्षिण दिशा की ओर पिण्डदान और तर्पण?
पितृपक्ष पितरों को स्मरण करने का समय माना गया है। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आरम्भ होकर यह अश्विनी कृष्ण अमावस्या तक, जिसे महालय कहते हैं। पितृ कार्य में महत्वपूर्ण कई बातें हैं जो रहस्यमयी हैं, जो लोगों के मन में सवाल उत्पन्न करती हैं।
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ऐसा क्यों?
- श्राद्ध में नियम है कि दोपहर के समय पितरों के नाम से श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन करवाते हैं। शास्त्रों में प्रातः काल एवं सायंकाल का समय देव कार्य के लिए निश्चित किया गया है।
- दिन के मध्य का समय पितरों का माना गया है। पितृ मृत्युलोक और देवलोक के मध्य में निवास करते हैं, जो चन्द्रमा के ऊपर बताया गया है।
- दोपहर से सूर्यनारायण अस्त की ओर बढ़ने लगते हैं, जिससे सूर्य की किरण निरुतेज होकर पश्चिम की ओर हो जाती है। जिससे पितृगण अपने निमित्त दिये पिंड पूजन और भोजन को प्राप्त कर लेते हैं।
- पितरों का आगमन दक्षिण दिशा में चंद्रमा के ऊपर की कक्षा में पितृलोक की स्थिति है।
- इस दिशा को यम की दिशा भी माना जाता है। इसलिए दक्षिण दिशा में दाह संस्कार, पितरों का पिंड पूजन, तर्पण आदि किया जाता है।
पितरों की पूजा में सफेद रंग का प्रयोग ही क्यों?
- आत्मा का कोई रंग नहीं होता, जीवन के उस पार की दुनिया रंगविहीन और पारदर्शी है।
- पितरों की पूजा में सफ़ेद रंग इसलिए किया जाता है, क्योंकि सफेद रंग सात्विकता का प्रतीक है।
- आत्मा का कोई रंग नहीं होता। जीवन के उस पार की दुनिया रंगविहीन पारदर्शी है।
- इसके कारण पितरों के पूजन में सफेद रंग का उपयोग किया जाता है।
- सफेद रंग चंद्रमा से संबंध रखता है जो कि पितरों को उनका अंश पहुंचाते हैं।
- पुराणों के अनुसार मनुष्य की मृत्यु जिस तिथि को हुई है, उसी तिथि में उसका श्राद्ध किया जाता है।
( पितृ शांति के मुख्य उपाय)
- श्राद्ध वाले दिन श्रीमद् भागवत गीता के सातवें अध्याय का महत्व पढ़कर फिर पूरा सातवां अध्याय पढ़ें।
- सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या को सायंकाल के समय एक दीपक तेल या गौ घी का जलाकर दरवाजे के बाहर रख कर काले तिल भी रखें एवं ऐसी प्रार्थना करें कि
" सेवा कुछ किन्हीं नहीं, दिया न कुछ भी ध्यान।
अपराध सब क्षमा करो, हमें जान अनजान।
दीप -ज्योति हमने करी, लिजो पंथ निहार।
जो कुछ भी हमसे बनो, दीन्हो तुम्हें आहार।
नमस्कार बार-बार करूं, रखियो वंश को ध्यान।
आशीर्वाद सदैव देते रहो, फूले फले बगियान।।