जॉब और पढ़ाई में चाहिए सफलता? Basant Panchami पर इस दिशा में स्थापित करें मां सरस्वती की मूर्ति
विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी का पर्व इस वर्ष 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ माह के ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 22 Jan 2026 06:52:03 PM (IST)Updated Date: Thu, 22 Jan 2026 06:52:03 PM (IST)
Basant Panchami पर इस दिशा में स्थापित करें मां सरस्वती की मूर्तिHighLights
- 23 जनवरी को है वसंत पंचमी, विद्या की देवी की पूजा का है विशेष दिन
- उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में करें मूर्ति स्थापना, करियर में मिलेगा लाभ
- कमल पर बैठी और मुस्कुराती प्रतिमा लाएं घर, बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा
धर्म डेस्क। विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी का पर्व इस वर्ष 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ही मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इस दिन भक्त घरों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि मूर्ति की स्थापना सही दिशा और सही मुद्रा में की जाए, तो साधक को ज्ञान के साथ-साथ करियर में अपार सफलता प्राप्त होती है।
![naidunia_image]()
स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ दिशाएं (Vastu Directions)
वास्तु के नियमों का पालन करने से पूजा का पूर्ण फल मिलता है और घर में सकारात्मकता आती है...
- पूर्व दिशा (East): ज्ञान की प्राप्ति के लिए इस दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। यहाँ मूर्ति स्थापित करने से एकाग्रता बढ़ती है।
- उत्तर-पूर्व दिशा (North-East): इसे 'ईशान कोण' भी कहते हैं। यहाँ मां सरस्वती की पूजा करने से करियर में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं और आर्थिक समृद्धि आती है।
- उत्तर दिशा (North): घर में सुख-शांति और जॉब में तरक्की के लिए उत्तर दिशा में मूर्ति स्थापना करना लाभकारी होता है।
कैसी होनी चाहिए मां सरस्वती की मूर्ति?
मूर्ति का चयन करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें...
- बैठी हुई मुद्रा: कमल के पुष्प पर विराजमान मां सरस्वती की मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है। यह स्थिरता और एकाग्रता का प्रतीक है।
- सौम्य भाव: मां सरस्वती के चेहरे पर प्रसन्नता और आशीर्वाद देने का भाव होना चाहिए। घर में कभी भी उदास या उग्र मुद्रा वाली प्रतिमा न लाएं।
- हाथों की स्थिति: देवी के दो हाथों में वीणा होनी चाहिए, जो कला और संगीत के प्रति प्रेम व सामंजस्य को दर्शाती है। उनके अन्य हाथों में पुस्तक और स्फटिक की माला होना भी शुभ माना जाता है।
यह भी पढ़ें- तुलसी के इन संकेतों को न करें नजरअंदाज... लक्ष्मी आगमन से लेकर धन लाभ तक, पौधा पहले ही देता है सूचना