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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव की भक्ति का सबसे पवित्र और पावन महीना सावन इस बार श्रद्धालुओं के लिए कई मायनों में बेहद खास रहने वाला है। इस साल करीब 23 साल के लंबे इंतजार के बाद सावन में एक ऐसा दुर्लभ महासंयोग बन रहा है, जब नागपंचमी का पर्व सोमवार के दिन पड़ रहा है। सावन सोमवार और नागपंचमी का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस विशेष संयोग को 'सोमवती नागपंचमी' कहा जाता है, जिसे लेकर देशभर के शिव मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
मिशन महादेव फाउंडेशन के फाउंडर और स्पिरिचुअल लाइफ एक्सपर्ट संदीपनूतन कालीरत्न (भैरवानंद तीर्थ सरस्वती) ने खास बातचीत में बताया कि 30 जुलाई से भगवान शंकर और देवी पार्वती का पवित्र पावन सावन माह शुरू हो रहा है। इस महीने का आध्यात्मिक महत्व शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने में माता पार्वती ने अपनी कठिन तपस्या से भगवान शंकर को प्रसन्न कर उन्हें अपने पति (अर्धांग) के रूप में प्राप्त किया था।
स्पिरिचुअल एक्सपर्ट के अनुसार, इस बार सावन में नागपंचमी सोमवार के दिन आ रही है, और ऐसा दुर्लभ योग पूरे 23 साल बाद बन रहा है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव, माता पार्वती और नाग देवता की विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस महासंयोग में पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इस पूरे सावन महीने के एक-एक दिन को व्यर्थ न जाने दें, क्योंकि सावन का हर दिन शिव का दिन है। श्रद्धालुओं को शिव को अपने जीवन में उतारने और उनसे खुद को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। इस पूरे महीने में भक्त कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान और सेवा कार्य कर सकते हैं:
इस दुर्लभ संयोग में किए गए व्रत, दान, जप और पूजा-पाठ का फल कई गुना अधिक मिलता है। यही वजह है कि इस बार का सावन धार्मिक के साथ-साथ ज्योतिषीय और आध्यात्मिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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