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धर्म डेस्क, नई दिल्ली. भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और पावन माना जाने वाला श्रावण (सावन) मास शुरू हो गयैा है। इस बार का सावन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास और दुर्लभ माना जा रहा है। दरअसल, कई दशकों के बाद ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है, जब सावन के पूरे महीने के दौरान सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ने वाले हैं।
अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, इस सावन का पहला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को अमावस्या के दिन लगेगा, जबकि दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि पर पड़ेगा। हालांकि, ये दोनों ही ग्रहण भारत में दृश्यमान (दिखाई) नहीं देंगे, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक इनका सूक्ष्म प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर देखने को मिल सकता है।
पंडित कल्कि राम ने बताया कि श्रावण मास भोलेनाथ की उपासना के लिए सबसे उत्तम काल माना जाता है। इस पूरे महीने में श्रद्धालुओं को शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र और शिव पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का नियमित जाप करना चाहिए। मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और कड़े नियमों के साथ की गई शिव भक्ति से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल और सावन के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दौरान किए गए आध्यात्मिक उपाय जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति लाते हैं।
श्रद्धालु इस पावन महीने में व्रत-उपवास, दान-पुण्य और सात्विक जीवनशैली अपनाकर महादेव की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।