30 जुलाई से शुरू हो रहा है शिव जी का प्रिय महीना, इस साल भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां..
30 जुलाई से शुरू हो रहे सावन 2026 में शिव जी की कृपा पाने के लिए तामसिक आहार, कठोर वाणी, वर्जित सामग्री और दिखावे जैसी 4 गलतियों से बचकर सात्विक पूजन ...और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Wed, 29 Jul 2026 05:05:43 PM (IST)Updated Date: Wed, 29 Jul 2026 05:05:43 PM (IST)
30 जुलाई से शुरू हो रहे सावन माह में पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करना चाहिए। (AI जनरेटेड)HighLights
- सावन में संयम से पूजन करने पर विशेष फल मिलता है
- सावन के दौरान तामसिक भोजन करने से बचना चाहिए
- इस पावन माह में रोजाना गंगाजल से जलाभिषेक करना शुभ है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली. हिंदू धर्म में सावन के महीने को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और फलदायी समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के पूरे महीने में भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर मिलता है। इस दौरान केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अपने खान-पान, व्यवहार और जीवनशैली में भी शुद्धता और संयम बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
ज्योतिषविद के अनुसार, यदि आप सावन के महीने में कुछ खास धार्मिक नियमों का पालन करते हैं और वर्जित कामों से परहेज रखते हैं, तो महादेव का आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहता है। आइए जानते हैं सावन में क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना जरूरी है।
सावन के महीने में क्या करें?
- शिवलिंग का नियमित जलाभिषेक: सावन में रोजाना भगवान शिव का जलाभिषेक करें। संभव हो तो जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। कम से कम एक बेलपत्र अवश्य अर्पित करें।
- पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक: इस पवित्र महीने में कम से कम एक बार मिट्टी से बने पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक अवश्य करवाएं। माना जाता है कि पार्थिव पूजन से भोलेनाथ अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं।
- सावन सोमवार का व्रत और दान: सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखें और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें। पूजन में कच्चा दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा और आक के फूल अर्पित करें। पूजा के बाद गरीबों व जरूरतमंदों को भोजन या फल का दान करें।
- शिव पुराण का पाठ: अपनी सुविधा और समय के अनुसार प्रतिदिन शिव पुराण का पाठ करें। नियमित रूप से थोड़ा सा पाठ करना भी बेहद शुभ और कल्याणकारी माना गया है।
- सफेद वस्तुओं का दान और खीर का भोग: अपनी सामर्थ्य के अनुसार दूध, चावल, चीनी और आटा जैसी सफेद चीजों का दान करें। भगवान शिव को खीर का भोग लगाकर प्रसाद बांटने से बड़ा पुण्य मिलता है। इसके अलावा, मंदिर में तांबे का लोटा, जल पात्र, पीतल या मिट्टी का घड़ा और पूजा सामग्री दान करने से भी विशेष लाभ होता है।
मंत्र जाप और श्रमदान: रुद्राक्ष की माला से रोजाना 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। यदि आर्थिक रूप से दान करना संभव न हो, तो मंदिर की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सेवा में अपना योगदान (श्रमदान) दें। सावन में भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां
- तामसिक भोजन का सेवन: सावन के महीने में लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा (शराब) का सेवन पूरी तरह से त्याग दें और केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। इसके अलावा, सावन में सब्जियों में विशेष रूप से बैंगन खाने की मनाही होती है।
- कठोर वाणी और घर में कलह: इस दौरान किसी को गाली-गलौज न दें, क्रोध से बचें और अपनी भाषा में मिठास रखें। घर का माहौल शांत व सौहार्दपूर्ण रखें और परिवार में लड़ाई-झगड़े या तनाव से दूर रहें।
- पूजा में वर्जित वस्तुएं न चढ़ाएं: भगवान शिव की पूजा में केतकी और केवड़े के फूल का इस्तेमाल न करें। इसके अलावा, शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, सिंदूर, कुमकुम, हल्दी और शंख से जल अर्पित करना सख्त वर्जित माना जाता है।
- पूजा-पाठ में लापरवाही और दिखावा: सावन में पूरी श्रद्धा, नियम और पवित्रता के साथ शिवजी की आराधना करें। बाहरी दिखावे की जगह अपने भाव और समर्पण को महत्व दें। सच्चे मन से की गई थोड़ी सी भक्ति भी आपका कल्याण कर सकती है।