अक्षय तृतीया पर 20 अप्रैल को सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग, अबूझ मुहूर्त में गूंजेगी शहनाई
अक्षय तृतीया के संबंध में कहा जाता है कि इस दिन जो भी धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है, उसका पुण्य फल अक्षय होता है। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 13 Apr 2026 02:00:56 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 Apr 2026 02:09:45 PM (IST)
अक्षय तृतीया पर बन रहा विशेष संयोग।HighLights
- भगवान विष्णु और पितरों के लिए करें मटके का दान
- कृष्ण को चंदन और तुलसी दल अर्पित करें
- गृह प्रवेश, नए प्रतिष्ठान के शुभारंभ के लिए भी श्रेष्ठ दिन
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। अक्षय तृतीया पर 20 अप्रैल को सर्वार्थसिद्धि योग का महासंयोग रहेगा। अबूझ मुहूर्त में शहनाई की गूंज सुनाई देगी। विवाह समारोह में नवयुगल परिणय सूत्र में बंधेंगे। प्रतिष्ठान के शुभारंभ, नया व्यापार व्यवसाय शुरू करने तथा गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्यों के लिए भी यह दिन श्रेष्ठ है। शहर में अनेक स्थानों पर सामूहिक विवाह के आयोजन भी होंगे।
ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया इस बार अक्षय तृतीया 20 अप्रैल को सोमवार के दिन रोहिणी नक्षत्र की साक्षी में आ रही है। सोमवार के दिन रोहिणी नक्षत्र का होना सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण करता है। यह योग प्रत्येक शुभ, मांगलिक कार्यों का सौ गुना शुभ फल दान करता है। योग साधना को सिद्ध करने वाला है।
इसलिए इस योग में पूजा अर्चना तथा काम्य अनुष्ठान किए जाते हैं। अक्षय तृतीया जैसी महत्वपूर्ण तिथि पर इस योग का होना सर्वथा शुभिच्छकारी माना गया है। इसलिए इस दिन का लाभ दान पुण्य, विवाह, गर्भगृह प्रवेश, गृह आरंभ, नया व्यापार व्यवसाय शुरू करना, आभूषण व नई वस्तुओं की खरीदी में लिया जा सकता है।
भगवान विष्णु तथा पितरों के लिए करें घट दान
पौराणिक एवं धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु एवं पितरों के निमित्त दो घट (मिट्टी की मटका) का पूजन करना चाहिए। एक घट मे भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए जल भरें और जौ, चंदन तथा पीले फूल डालें।
इसी प्रकार दूसरे घट में पितरों के निमित्त जल में काले तिल, चंदन कच्चा दूध और सफेद पुष्प यह डालना चाहिए। दो ब्राह्मणों के माध्यम से संकल्प करवाकर दान करें। ऐसा करने से संतान के अभाव में रहने वाले दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है और जिनके संतान है उनके संतान की दीर्घायु होती है साथ ही अवरोधों का निराकरण होता है।
कृष्ण को चंदन तथा तुलसी दल अर्पित करें
वैशाख मास भगवान विष्णु व श्रीकृष्ण की आराधना के लिए विशेष माना गया है। इस पुण्य पवित्र मास में त्रिकाल संध्या के समय भगवान को चंदन लगाएं तथा तुलसी अर्पण करें। इससे भगवान की शराणागति मिलती है तथा आध्यात्मिक स्पंदन की स्थिति निर्मित होती है।
अक्षय पुण्य की प्राप्ति के लिए विष्णु याग की मान्यता
अक्षय तृतीया के संबंध में कहा जाता है कि इस दिन जो भी धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है, उसका पुण्य फल अक्षय होता है। जो भी दान किया जाता है उसका भी पुण्य फल अक्षय होता है। इसी क्रम में यदि विष्णु पुराण की हम बात करें तो वैशाख मास में भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए चंदन अर्चन या पुष्प अर्चन विशेषकर मोगरा, सुगंधित पुष्प, सुगंधित द्रव्य, शीतल जल आदि के माध्यम से शास्त्रीय पद्धति से पूजन करने पर भगवान विष्णु की प्रसन्नता तो होती ही है।
साथ ही अक्षय पुण्य की भी प्राप्ति होती है। धर्म अध्यात्म में प्रगति के साथ-साथ सांसारिक जीवन में भी सुख शांति तथा संतान प्राप्ति एवं अलग-अलग प्रकार से पदोन्नति का सुखद समाचार भी प्राप्त होता है।
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