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देवशयनी एकादशी पर बन रहा अमृतसिद्धि योग, जानिए शुभ मुहूर्त, चातुर्मास और शालिग्राम पूजन की विधि

यह समय केवल जप, तप, व्रत और भगवान की भक्ति के लिए उत्तम माना गया है।

By Jogendra SenEdited By: Rajdil Shivhare
Publish Date: Tue, 21 Jul 2026 09:27:22 AM (IST)Updated Date: Tue, 21 Jul 2026 09:27:42 AM (IST)
देवशयनी एकादशी पर बन रहा अमृतसिद्धि योग, जानिए शुभ मुहूर्त, चातुर्मास और शालिग्राम पूजन की विधि
भगवान चक्रधर का फाइल फोटो।

HighLights

  1. शुभ योग और पूजा का मुहूर्त
  2. चार माह के लिए योग निद्रा में भगवान विष्णु
  3. शालिग्राम जी की सरल पूजन विधि

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में 'योगनिद्रा' में चले जाते हैं। इसके बाद वे देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। देवशयनी एकादशी से ही 'चातुर्मास' (चार महीने का पवित्र समय) शुरू हो जाता है। इन चार महीनों में कोई भी शुभ कार्य जैसे- शादी, मुंडन या गृह प्रवेश नहीं किया जाता है। यह समय केवल जप, तप, व्रत और भगवान की भक्ति के लिए उत्तम माना गया है।

देवशयनी एकादशी पर बनेंगे शुभ योग

देवशयनी एकादशी पर अमृतसिद्धि योग, शिववास योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग जैसे कई शुभ संयोग बनते हैं। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।

देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह नौ बजकर 12 मिनट से शुरू होकर 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 25 जुलाई को ही मान्य होगा। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह चार बजकर 16 मिनट से सुबह चार बजकर 57 मिनट बजे तक, संध्या काल मुहूर्त: शाम सात बजकर 17 मिनट से रात आठ बजकर 19 मिनट तक रहेगा। पारण (व्रत तोड़ने) का समय 26 जुलाई को सुबह पांच बजकर 39 मिनट से आठ बजकर 22 मिनट तक है। इस दिन व्रत रखने से सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।


देवशयनी एकादशी पर होगी शालिग्राम जी की पूजा

देवशयनी एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। सूर्य देव को जल चढ़ाएं फिर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत और पूजा संकल्प लें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कर उसे साफ करें, पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। शालिग्रामजी को उस पर स्थापित करें। शालिग्रामजी का पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें। उन्हें पीले वस्त्र पहनाकर उनका चंदन और आभूषणों से शृंगार करें।

रोली, मोली, हल्दी, गुलाल, अबीर, फूल, फल, धूप, दीप, कपूर, और नैवेद्य आदि पूजन में शामिल करें। केला, पंचमेवा, पंजीरी, पंचामृत में से किसी भी व्यंजन का भोग जरूर लगाएं, इसमें तुलसी दल जरुर डालें। ओम नमो नारायण मंत्र का जाप करें। देवशयनी एकादशी की कथा पढ़ें और आरती के बाद पूजा में हुई गलतियों की क्षमा याचना करें।