
धर्म डेस्क। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। वैसे तो साल में कुल 12 अमावस्या तिथि होती है, लेकिन इसमें का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस मौके पर सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिसके कारण यहां सूतक काल के नियम मान्य नहीं होंगे।
इसके बावजूद, ज्योतिष शास्त्र ग्रहण काल के दौरान सावधानी बरतने और नियमों का पालन करने की सलाह देता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 17 फरवरी, मंगलवार को फाल्गुन अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, अमावस्या की तिथि तक मन के कारक चंद्र देव मकर राशि में विराजमान रहेंगे। चंद्रमा का यह गोचर विशेष रूप से दो राशियों के लिए सफलता और सुखद परिणाम लेकर आने वाला है।
कर्क राशि के स्वामी स्वयं चंद्र देव हैं, इसलिए इस गोचर का सर्वाधिक सकारात्मक प्रभाव इसी राशि पर पड़ेगा। इस दौरान आपके भीतर नेतृत्व क्षमता जागृत होगी। यदि आप कारोबार विस्तार की योजना बना रहे हैं, तो यह सही समय है। निवेश के प्रयासों में 'विजयश्री' मिलने के प्रबल योग हैं। इस दौरान जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा। हालांकि, व्यापारिक परिस्थितियों के कारण कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं।
मकर राशि में चंद्रमा की उपस्थिति मीन राशि के जातकों के लिए खुशियों की सौगात लाएगी। आपकी गणना बुद्धिजीवियों में होगी और धन-संपत्ति में वृद्धि के योग बनेंगे। इसके अलावा सरकारी कार्यों में रुके हुए लाभ प्राप्त हो सकते हैं। इसमें सलाह दी जाती है कि चंचलता के कारण काम पेंडिंग न छोड़ें। कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले घर के बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें। जलीय स्थानों की यात्रा के भी योग बन रहे हैं।
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